हरियाणा के कृषि मंत्री का बेतुका बयान:कहा-बारिश से फसल को फायदा हुआ,पैदावार बढ़ी
हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बारिश को फसल के लिए फायदेमंद बताया, जबकि ओलावृष्टि से 361 गांवों में फसल खराब होने और वैज्ञानिकों द्वारा नुकसान की पुष्टि के बाद विवाद बढ़ गया है।
■ कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का बयान विवादों में, बोले-बारिश से फसल को फायदा
■ किसानों ने जताई नाराजगी, ओलावृष्टि से 361 गांवों में फसल बर्बाद
■ वैज्ञानिकों ने किया खंडन, पकी फसल को बारिश से नुकसान बताया
हिसार/करनाल में हरियाणा के कृषि मंत्री Shyam Singh Rana के एक बयान ने सियासी और किसान वर्ग में हलचल मचा दी है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हजारों एकड़ फसल खराब होने के बीच मंत्री ने कहा कि बारिश से फसल को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होता है और पैदावार बढ़ती है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ गई है।
कृषि मंत्री ने करनाल और अंबाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सीधी बारिश फसल के लिए लाभकारी होती है और इससे प्रति एकड़ करीब 1 से 2 क्विंटल तक उत्पादन बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नुकसान केवल ओलावृष्टि, आंधी और तूफान से होता है, जबकि सामान्य बारिश से कोई हानि नहीं होती।
हालांकि मंत्री के इस बयान के विपरीत, प्रदेश में हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से 8 जिलों के 361 गांवों में फसलें 5% से 100% तक खराब होने की रिपोर्ट सामने आई है। गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसान लगातार सरकार से स्पेशल गिरदावरी की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
इस बयान को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष और किसान नेताओं ने इसे किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है। इससे पहले सिंचाई मंत्री Shruti Choudhry भी बारिश को लेकर इसी तरह का बयान दे चुकी हैं, जिस पर भी विवाद हुआ था।
वहीं, कृषि विशेषज्ञों की राय मंत्री के बयान से अलग है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी बिश्नोई के अनुसार, पकी हुई गेहूं की फसल पर बारिश नुकसानदायक होती है। उन्होंने बताया कि अगर फसल कटने के बाद बारिश होती है तो उसमें नमी आ जाती है, जिससे अनाज खराब होने या अंकुरित होने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल देर से बोई गई (पछेती) फसल को ही तापमान में गिरावट और हल्की बारिश से कुछ फायदा हो सकता है, जबकि अगेती और पकी हुई फसल को इससे नुकसान ही होता है।
फिलहाल मौसम विभाग ने 7 और 8 अप्रैल को फिर से बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार नुकसान का सही आकलन कैसे करेगी और किसानों को राहत कब मिलेगी।
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