चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट में 7 आरोपी गिरफ्तार, बड़ा खुलासा- 2 लाख की डील और विदेशी हैंडलर्स का खेल उजागर

चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट केस में 7 आरोपी गिरफ्तार। 2 लाख की डील, विदेशी हैंडलर्स और ISI लिंक का बड़ा खुलासा, पुलिस जांच जारी।

चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट में 7 आरोपी गिरफ्तार, बड़ा खुलासा- 2 लाख की डील और विदेशी हैंडलर्स का खेल उजागर

चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट केस में 7 आरोपी गिरफ्तार
2 लाख की डील, लेकिन पैसे फंसने से खुली साजिश
विदेशी हैंडलर्स और ISI लिंक की जांच में बड़ा खुलासा


चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय के बाहर हुए ब्लास्ट केस में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए दो मुख्य आरोपियों के साथ कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अमनप्रीत सिंह, गुरतेज सिंह के अलावा बलविंदर लाल उर्फ शम्मी, जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा शामिल हैं। सभी आरोपियों को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

जांच में सामने आया है कि इस वारदात के लिए आरोपियों के बीच 2 लाख रुपए की डील तय हुई थी। हालांकि यह रकम उनके खाते में नहीं पहुंच पाई, क्योंकि विदेश में बैठे हैंडलर्स ने निर्देश दिया था कि पैसे अपने खाते में न लेकर किसी अन्य व्यक्ति के खाते में डलवाए जाएं, ताकि पकड़े जाने का खतरा कम रहे। लेकिन आरोपियों को ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, जो अपने खाते का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हो।

पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन के तार विदेश में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हैं, जिनकी लोकेशन पुर्तगाल और जर्मनी बताई जा रही है। Gaurav Yadav ने बताया कि शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क का संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से हो सकता है, जो पंजाब में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही थी।

डीजीपी के अनुसार, दोनों मुख्य आरोपियों की मुलाकात करीब 6 महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। इसके बाद 28 मार्च को गुरतेज को टास्क दिया गया कि वह हथियार और ग्रेनेड लेकर आए। इसके लिए उसे बलाचौर से हथियार उपलब्ध कराए गए, जिसमें 2 हैंड ग्रेनेड, एक पिस्टल और 10 कारतूस शामिल थे।

घटना वाले दिन अमनप्रीत ने ग्रेनेड फेंका, जबकि गुरतेज ने उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की। इस वीडियो का इस्तेमाल विदेशी हैंडलर्स द्वारा माहौल बनाने के लिए किया जाना था। पूरे ऑपरेशन में तकनीकी माध्यमों और ऑनलाइन निर्देशों का इस्तेमाल किया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को ग्रेनेड को एक्टिव करने तक के निर्देश ऑनलाइन दिए गए थे। यह पूरा मॉड्यूल एक संगठित नेटवर्क की तरह काम कर रहा था, जिसमें हर व्यक्ति को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी।

इस मामले में पंजाब पुलिस की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई है। हालांकि ऑपरेशन को ज्वाइंट ऑपरेशन बताया गया, लेकिन मौके पर और प्रेस कॉन्फ्रेंस में चंडीगढ़ पुलिस की भूमिका कम नजर आई। हथियारों और आरोपियों की गिरफ्तारी भी मुख्य रूप से पंजाब पुलिस द्वारा की गई।

इससे पहले भी पंजाब यूनिवर्सिटी फायरिंग केस और अन्य वारदातों में इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिली थी। इसको लेकर पुलिस विभाग में भी चर्चा का माहौल बना हुआ है।

चंडीगढ़ प्रशासक Gulab Chand Kataria ने हाल ही में शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स बनाने की बात सामने आई, लेकिन अब तक इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

सूत्रों के अनुसार, इस हमले में पाकिस्तानी GHD2P हैंड ग्रेनेड के इस्तेमाल की भी आशंका जताई गई है, जो विस्फोट के बाद 5 से 10 मीटर तक घातक प्रभाव डाल सकता है और इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और विदेशी हैंडलर्स की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।