भाजपा नेता संत सुरेहती पर हमले से गरमाई राजनीति:झज्जर में परशुराम भवन की आधारशिला बनी विवाद
झज्जर में परशुराम भवन कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता संत सुरेहती पर हमले के बाद सियासत गरमा गई है। MLA कुलदीप वत्स पर आरोप लगे हैं, जबकि उन्होंने सबूत मांगते हुए आरोपों को खारिज किया है।
■ झज्जर में भाजपा नेता संत सुरेहती पर हमला, परशुराम भवन कार्यक्रम बना विवाद
■ MLA कुलदीप वत्स पर आरोप, बोले- सबूत पेश करो, मेरा लेना-देना नहीं
■ ब्राह्मण समाज में आक्रोश, CM से मिलने और कार्रवाई की मांग
झज्जर शहर के सेक्टर-9 में भगवान परशुराम भवन की आधारशिला कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब ब्राह्मण महासभा के जिला महासचिव एवं भाजपा नेता संत सुरेहती और उनके बेटे के साथ मारपीट की घटना सामने आई। इस घटना के बाद न केवल सियासी माहौल गरमा गया, बल्कि ब्राह्मण समाज में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।घटना के बाद संत सुरेहती ने आरोप लगाया कि यह हमला सुनियोजित तरीके से किया गया था। उनका कहना है कि कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद लोगों के सामने ही मारपीट हुई और इसमें कुछ बाहरी लोगों के साथ-साथ स्थानीय प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदार भी शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सबूत मौजूद हैं, जिन्हें पुलिस को सौंपा जाएगा।
मामले में बादली से कांग्रेस विधायक Kuldeep Vats पर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अगर आरोपों में सच्चाई है तो सबूत पेश किए जाएं, उनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसे आरोपों को गंभीरता से नहीं लेते।वहीं, गांव दूबलधन निवासी पंडित हरि शमशेर कौशिक ने इस घटना को पूरे ब्राह्मण समाज पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि समाज की आस्था और सम्मान पर चोट है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि समाज ऐसे लोगों का बहिष्कार करेगा।
कौशिक ने जानकारी दी कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही एक ओपन हाउस मीटिंग बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही मुख्यमंत्री से मिलकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।
इस बीच भाजपा नेता Om Prakash Dhankhar ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समाज से कोई बड़ा नहीं होता और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सामाजिक आयोजनों में हिंसा को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।घटना के बाद पुलिस को लिखित शिकायत दी जा चुकी है और कई वीडियो भी सामने आए हैं। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में कौन दोषी पाया जाता है और कब तक सच्चाई सामने आती है।
घटना ने समाज में भी गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि अगर कोई निजी विवाद था तो उसे धार्मिक कार्यक्रम में नहीं लाना चाहिए था। भगवान परशुराम की आधारशिला के दौरान हुआ यह विवाद लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना जा रहा है।
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