टिकट आवंटन पर भाजपा और कांग्रेस में बगावत: BJP मंडल उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा- रेवाड़ी में पूनम सतीजा निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी

हरियाणा निकाय चुनाव में BJP टिकट वितरण के बाद बगावत तेज हो गई है। रेवाड़ी में पूनम सतीजा ने इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया, कांग्रेस में भी विरोध सामने आया।

टिकट आवंटन पर भाजपा और कांग्रेस में बगावत: BJP मंडल उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा- रेवाड़ी में पूनम सतीजा निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी
  • टिकट कटते ही BJP में बगावत, मंडल उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
  • रेवाड़ी में पूनम सतीजा निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी, कांग्रेस में भी विरोध
  • उकलाना से निकिता गोयल को टिकट, कई सीटों पर समीकरण बदले

हरियाणा नगर निकाय चुनाव को लेकर जारी उम्मीदवारों की सूची के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गई है। BJP में टिकट कटने के बाद बगावत खुलकर सामने आ रही है। रेवाड़ी में वार्ड नंबर-8 की निवर्तमान पार्षद पूनम सतीजा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

पूनम सतीजा BJP मंडल उपाध्यक्ष पद पर थीं और पिछले करीब 13 साल से पार्षद के तौर पर सक्रिय राजनीति में रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने उनकी लगातार अनदेखी की है। इसी कारण उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनका इस्तीफा भाजपा जिला अध्यक्ष को भेजा जा चुका है।

दूसरी ओर कांग्रेस में भी बगावत देखने को मिल रही है। पूर्व चेयरपर्सन शकुंतला भाड़ोरिया ने भी निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला लिया है। इससे साफ है कि नगर निकाय चुनाव में इस बार बागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे मुकाबले और रोचक हो जाएंगे।

इसी बीच BJP ने कई अहम उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। सांपला से प्रवीन कोच, रेवाड़ी से विनीता पीपल और धारूहेड़ा से अजय जांगड़ा को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं उकलाना नगर पालिका से निकिता गोयल को चेयरपर्सन पद का टिकट दिया गया है, जो पूर्व वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन चेयरमैन श्रीनिवास गोयल की पुत्रवधू हैं।

अजय जांगड़ा ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हैं और राव इंद्रजीत सिंह के समर्थक माने जाते हैं। वे पहले पार्षद रह चुके हैं और नगर पालिका उपप्रधान भी रह चुके हैं। वहीं प्रवीन कोच पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और 2008-2013 के दौरान सांपला चेयरमैन रहे हैं, लेकिन हाल ही में BJP में शामिल हुए हैं।

रेवाड़ी से उम्मीदवार विनीता पीपल का भी मजबूत राजनीतिक बैकग्राउंड रहा है। वे 2016 में नगर परिषद चेयरमैन रह चुकी हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़ी हैं। हालांकि टिकट मिलने के बाद उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थानीय विधायक का नाम न लेना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

कुल मिलाकर, टिकट वितरण के बाद BJP और कांग्रेस दोनों में असंतोष उभरकर सामने आया है, जिससे आने वाले चुनावों में राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं