हरियाणा में बिजली दरें नहीं बढ़ेंगी, 83.79 लाख उपभोक्ताओं को राहत
हरियाणा में बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं, 83.79 लाख उपभोक्ताओं को राहत। किसानों को सब्सिडी जारी, स्मार्ट मीटर पर 5% छूट।
■ घाटे के बावजूद HERC का बड़ा फैसला, कंपनियों को सुधार के निर्देश
■ किसानों को सस्ती बिजली जारी, स्मार्ट मीटर पर 5% छूट का ऐलान
हरियाणा के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से राज्य के करीब 83.79 लाख उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा। नया टैरिफ 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसे व्यापक जनसुनवाई तथा परामर्श प्रक्रिया के बाद अंतिम रूप दिया गया है।
सबसे अहम बात यह है कि बिजली वितरण कंपनियों UHBVNL और DHBVNL ने अपनी याचिकाओं में करीब 4,484.71 करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान जताया था, इसके बावजूद आयोग ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से साफ इनकार कर दिया। जनसुनवाई के दौरान भी सभी वर्गों के उपभोक्ताओं ने बिजली दरें न बढ़ाने की मांग रखी थी, जिसे ध्यान में रखते हुए यह बड़ा फैसला लिया गया।
आयोग ने केवल राहत देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बिजली कंपनियों को सख्त निर्देश भी दिए हैं। उन्हें अपने खर्च और राजस्व संग्रह में सुधार करने और खासतौर पर AT&C Loss कम करने पर जोर देने को कहा गया है। जहां ज्यादा लाइन लॉस हो रहा है, वहां फीडर स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नुकसान को नियंत्रित किया जा सके और व्यवस्था मजबूत हो।
किसानों के लिए भी राहत जारी रखते हुए सरकार ने बिजली सब्सिडी को बरकरार रखा है। करीब 7,870.32 करोड़ रुपए की सब्सिडी के तहत किसानों को बेहद सस्ती दर पर बिजली मिलती रहेगी। जहां बिजली की वास्तविक लागत करीब 7.48 रुपए प्रति यूनिट है, वहीं किसानों को सिर्फ 0.10 रुपए प्रति यूनिट ही भुगतान करना होगा।
इसके अलावा किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन के लोड बढ़ाने का एकमुश्त मौका दिया गया है। 31 दिसंबर 2023 तक आवेदन करने वाले किसान 31 मई 2026 तक बिना वरिष्ठता प्रभावित किए अपना लोड बढ़ा सकेंगे। हालांकि, जिनके पास पहले से सोलर ट्यूबवेल कनेक्शन है, वे इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे।
बिजली सुधार की दिशा में Prepaid Smart Meter को बढ़ावा देने का भी फैसला लिया गया है। ऐसे उपभोक्ताओं को ऊर्जा शुल्क और फिक्स्ड चार्ज दोनों पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसे बिजली खपत को नियंत्रित करने और भुगतान प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इसके साथ ही सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए पंचकूला, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल और गुरुग्राम में EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं डिमांड साइड मैनेजमेंट (DSM) को मजबूत करने और बिजली की अधिकतम व न्यूनतम मांग के बीच 3,000 से 5,000 मेगावाट के अंतर को संतुलित करने पर भी फोकस किया गया है।
इस टैरिफ आदेश से पहले आयोग ने पंचकूला के साथ-साथ गुरुग्राम, पानीपत, हिसार और यमुनानगर में जनसुनवाई कर आम लोगों की राय ली। HERC के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा और सदस्य मुकेश गर्ग व शिव कुमार ने 25 मार्च को इस फैसले पर हस्ताक्षर किए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय एक संतुलित कदम है, जिसमें एक ओर उपभोक्ताओं को राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुधारात्मक कदम भी तय किए गए हैं।
Akhil Mahajan