गब्बर की बढ़ी चिंता, हरियाणा में बिजली चोरी व लाइन लॉस में बढ़ोतरी, कंपनियों पर आर्थिक संकट का खतरा
हरियाणा में बिजली चोरी व लाइन लॉस में इजाफा हुआ। 2025-26 में एटीएंडसी लॉस 11.06%, वसूली दर केवल 57% तक। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने अधिकारियों की बैठक बुलाई।
➤ हरियाणा में बिजली चोरी और लाइन लॉस बढ़ा, आर्थिक संकट की संभावना
➤ 2025-26 में एटीएंडसी लॉस बढ़कर 11.06%, UHBVN व DHBVN पर वित्तीय दबाव
➤ बिजली चोरी के 48688 मामले पकड़े गए, पर वसूली दर केवल 57% तक सीमित रही
हरियाणा में बिजली वितरण कंपनियों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि बिजली चोरी और लाइन लॉस (एटीएंडसी लॉस) में इजाफा हुआ है। प्रदेश में मुख्य रूप से दो बिजली वितरण कंपनियां काम कर रही हैं – उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN)। इन कंपनियों पर आर्थिक संकट का खतरा मंडरा रहा है। इसी को देखते हुए हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें अब तक की वसूली रिपोर्ट और चोरी के मामलों की समीक्षा की जाएगी।
अनिल विज पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि बिजली डिफाल्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि हर जिले के लिए रिकवरी का लक्ष्य तय किया जाए। इसके साथ ही अधिकारियों की रैंकिंग भी उनके प्रदर्शन के आधार पर तय की जाएगी।
पिछले वर्षों में हरियाणा ने एटीएंडसी लॉस में सुधार किया था। वित्तीय वर्ष 2012-13 में यह 29.31% था, जो 2015-16 में 30.02% तक पहुंच गया था। लेकिन स्मार्ट मीटर और बिलिंग सिस्टम में सुधार अभियान की मदद से यह घटकर 2024-25 में 9.97% रह गया था। फिर भी, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जून तक यह फिर बढ़कर 11.06% हो गया। इस समय UHBVN का लॉस 8.75% और DHBVN का 12.67% दर्ज किया गया। यह राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जिससे कंपनियों पर वित्तीय दबाव बना हुआ है।
बिजली चोरी रोकने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए। वित्त वर्ष 2024-25 में 1.78 लाख परिसरों की जांच की गई, जिनमें से 48688 चोरी के मामले सामने आए। इन पर कुल 18638.99 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया, लेकिन वसूली केवल 9365.21 लाख रुपए की हुई, यानी वसूली दर मात्र 50.25% रही। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 (जून तक) में 52630 परिसरों की जांच में 12398 मामले पकड़े गए। इस पर कुल 4925.21 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया, लेकिन वसूली सिर्फ 57 फीसदी तक ही सीमित रही।
एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। वर्ष 2013 में कुल 16496 एफआईआर दर्ज की गई थीं, जो 2017 में बढ़कर 95407 तक पहुंच गईं। वर्ष 2025 में (जुलाई तक) कुल 32059 मामले दर्ज हो चुके हैं। यह दर्शाता है कि कंपनियां अब बिजली चोरी को गंभीर अपराध मानते हुए कड़ी कार्रवाई कर रही हैं।
हालांकि चोरी पकड़ना आसान हो गया है, लेकिन जुर्माना वसूलना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। उदाहरण के तौर पर, 2007-08 में 2.62 लाख परिसरों की जांच में 45589 चोरी के मामले पकड़े गए, पर वसूली मात्र 45.90% ही हो सकी। इसी तरह 2015-16 में 45968 मामले सामने आए और 16862 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया, लेकिन वसूली दर केवल 51.63% तक ही सीमित रही।
इस पूरे परिदृश्य से यह स्पष्ट हो रहा है कि हरियाणा की बिजली वितरण कंपनियों के लिए चोरी पर काबू पाना एक बड़ी चुनौती है। उर्जा मंत्री अनिल विज ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे प्रभावी रणनीति बनाकर चोरी की घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ जुर्माना वसूली में भी सुधार करें। आगामी समय में इस दिशा में और कठोर कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है।