हरियाणा में टीचरों की नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार, 22 जून को कैबिनेट में जाएगा ड्राफ्ट; कई पुरानी छूटें होंगी खत्म

हरियाणा की नई टीचर ट्रांसफर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। 22 जून को कैबिनेट में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। 120 अंकों की मेरिट प्रणाली लागू करने की तैयारी है।

हरियाणा में टीचरों की नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार, 22 जून को कैबिनेट में जाएगा ड्राफ्ट; कई पुरानी छूटें होंगी खत्म

हरियाणा की नई टीचर ट्रांसफर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार, 22 जून को कैबिनेट में होगा पेश

120 अंकों की मेरिट आधारित प्रणाली से होंगे शिक्षकों के तबादले

अविवाहित महिला और पुरुष शिक्षकों को मिलने वाली कई पुरानी छूटें खत्म करने का प्रस्ताव

हरियाणा में लंबे समय से लंबित टीचर मॉडल ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। शिक्षा विभाग ने नई ट्रांसफर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। विभाग के निदेशक जितेंद्र दहिया के अनुसार इस ड्राफ्ट को 22 जून को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार, नई ट्रांसफर पॉलिसी को पूरी तरह मेरिट आधारित बनाने की तैयारी की गई है। इसके तहत 120 अंकों का मूल्यांकन सिस्टम प्रस्तावित किया गया है। शिक्षकों के तबादले इन्हीं अंकों के आधार पर किए जाएंगे। विभाग का मानना है कि इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और विवादों की संभावनाएं कम होंगी।

नई नीति में कई पुराने प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव भी शामिल है। सबसे बड़ा बदलाव 40 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित महिला शिक्षकों को मिलने वाले अतिरिक्त अंकों को लेकर किया गया है। प्रस्तावित नियमों के तहत अब उन्हें विशेष श्रेणी का लाभ नहीं मिलेगा और अतिरिक्त वेटेज भी समाप्त किया जा सकता है।

इसी प्रकार पुरुष शिक्षकों को नाबालिग बच्चों या अविवाहित बेटियों के आधार पर मिलने वाले अतिरिक्त अंकों को भी समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। यानी पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर मिलने वाली कई विशेष छूटें नई नीति में खत्म हो सकती हैं।

कपल केस से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार इस सुविधा का लाभ केवल नियमित यानी रेगुलर शिक्षकों को ही मिलेगा। अनुबंध आधारित या अन्य श्रेणी के शिक्षकों को इस व्यवस्था से बाहर रखा जा सकता है।

हरियाणा सरकार के आंकड़ों के अनुसार शिक्षा विभाग राज्य का सबसे बड़ा विभाग है। प्रदेश के कुल सरकारी कर्मचारियों में लगभग 34 प्रतिशत कर्मचारी इसी विभाग से जुड़े हुए हैं। ऐसे में नई ट्रांसफर पॉलिसी का प्रभाव हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों पर पड़ने वाला है।

गौरतलब है कि इससे पहले मनोहर लाल खट्टर सरकार के कार्यकाल में भी ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तकनीकी और व्यावहारिक खामियों के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। वहीं दिसंबर 2025 में लागू की गई नीति को लेकर भी कई शिक्षक अदालत पहुंच चुके हैं।

शिक्षा विभाग का दावा है कि इस बार नीति को अधिक पारदर्शी, अंक आधारित और विवादों को कम करने वाली व्यवस्था के रूप में तैयार किया गया है। अब शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों की नजर 22 जून को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई है।