मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 की उम्र में निधन, ओलंपिक पदक जीतकर बोली थी उनपर खास बात

भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज और मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पेरिस ओलंपिक में मनु की सफलता के पीछे उनकी अहम भूमिका रही थी।

मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 की उम्र में निधन, ओलंपिक पदक जीतकर बोली थी उनपर खास बात
  • भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन
  • पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर को दो पदक दिलाने में निभाई थी अहम भूमिका
  • मनु भाकर कोच नहीं, पिता समान मानती थीं जसपाल राणा को

भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता, दिग्गज निशानेबाज और भारतीय शूटिंग टीम के प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय निशानेबाजी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय उड़ान के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। भारत पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत नई दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद उनके हृदय में स्टेंट डाले गए। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही और आखिरकार उन्होंने अंतिम सांस ली।

जसपाल राणा सिर्फ एक सफल खिलाड़ी ही नहीं बल्कि भारतीय निशानेबाजी के सबसे प्रभावशाली कोचों में भी शामिल थे। उन्होंने वर्षों तक युवा खिलाड़ियों को तराशा और देश को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज दिए। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया।

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के लिए इतिहास रचने वाली मनु भाकर की सफलता के पीछे भी जसपाल राणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी कोचिंग में मनु भाकर ने दो कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। यह उपलब्धि भारतीय निशानेबाजी इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।

मनु भाकर और जसपाल राणा का रिश्ता सिर्फ कोच और खिलाड़ी तक सीमित नहीं था। मनु कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुकी थीं कि उनके जीवन में जसपाल राणा का स्थान एक पिता समान है। दोनों के बीच गहरा विश्वास, अनुशासन और समर्पण का रिश्ता था, जिसने उन्हें विश्व मंच पर सफलता दिलाई।

जसपाल राणा की काबिलियत की सराहना करते हुए मनु भाकर ने एक बार कहा था कि वह जो भी करते हैं, उसमें असाधारण रूप से प्रतिभाशाली हैं और उनके लिए हमेशा सबसे बेहतरीन कोच रहेंगे। मनु ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि उनके लिए जसपाल राणा हमेशा उनके अपने कोच रहेंगे।

कोच के रूप में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में मनु भाकर के अलावा सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे प्रतिभाशाली निशानेबाजों को तैयार करना भी शामिल है। 2012 से जूनियर पिस्टल कोच के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने भारतीय शूटिंग को नई दिशा दी।

राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उन्होंने आधुनिक कोचिंग तकनीकों और अनुशासन के जरिए भारतीय निशानेबाजी में नए मानदंड स्थापित किए।

खेलों में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। खिलाड़ी और कोच दोनों भूमिकाओं में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।