हरियाणा-पूर्व सांसद की फैमिली का एयरक्राफ्ट रनवे पर फंसा: हिसार एयरपोर्ट पर गलत रनवे पर उतरी एयर एंबुलेंस, विंग में घुसा कैट आई रिफ्लेक्टर; 6 घंटे उड़ानें बंद
हिसार एयरपोर्ट पर सुभाष चंद्रा के पिता का पार्थिव शरीर ला रही एयर एंबुलेंस गलत रनवे पर उतरकर क्षतिग्रस्त हो गई। सभी चार सवार सुरक्षित रहे।
➤ पूर्व सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता का पार्थिव शरीर मुंबई से लेकर आ रही एयर एंबुलेंस गलत रनवे पर उतरी
➤ कैट आई रिफ्लेक्टर से टकराकर विमान क्षतिग्रस्त, पायलट समेत चारों लोग सुरक्षित; DGCA ने जांच टीम बनाई
➤ शोक जताने पहुंचे बाबा रामदेव के हेलिकॉप्टर में ईंधन की समस्या, कम विजिबिलिटी के कारण सड़क मार्ग से हरिद्वार रवाना
हिसार। हरियाणा के हिसार एयरपोर्ट पर मंगलवार सुबह एक बड़ा विमान हादसा टल गया। पूर्व सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता नंद किशोर गोयनका का पार्थिव शरीर मुंबई से लेकर आ रही एयर एंबुलेंस लैंडिंग के दौरान कथित तौर पर चालू रनवे की बजाय बंद पड़े पुराने रनवे पर उतर गई। इस दौरान विमान कैट आई रिफ्लेक्टर और पुराने सिग्नल टावर से टकराकर रनवे पर फंस गया। टक्कर से विमान का विंग और नोज सेक्शन क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन पायलट समेत विमान में सवार सभी चार लोग सुरक्षित रहे।
घटना के बाद हिसार एयरपोर्ट पर करीब छह घंटे तक फ्लाइट ऑपरेशन बंद रखना पड़ा। मामले की जांच के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयरपोर्ट डायरेक्टर ओपी सैनी की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की है। टीम को 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई है।
इसी बीच नंद किशोर गोयनका के निधन पर शोक जताने हिसार पहुंचे बाबा रामदेव को भी वापसी के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा। उनके हेलिकॉप्टर के लिए ईंधन की व्यवस्था में समय लगा और बाद में विजिबिलिटी कम होने के कारण पायलट ने उड़ान भरने से इनकार कर दिया। इसके बाद बाबा रामदेव सड़क मार्ग से हरिद्वार के लिए रवाना हुए।
सुबह 10:54 बजे लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा, गलत रनवे पर उतरने की जांच
एयरपोर्ट अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा मंगलवार सुबह करीब 10 बजकर 54 मिनट पर हुआ। एयर एंबुलेंस में नंद किशोर गोयनका का पार्थिव शरीर मुंबई से हिसार लाया जा रहा था। विमान में पार्थिव शरीर के साथ डॉ. सुभाष चंद्रा के भाई अशोक गोयनका, एक अटेंडेंट, पायलट और क्रू मेंबर मौजूद थे। बताया गया है कि विमान लैंडिंग के दौरान कथित तौर पर नए और चालू रनवे की बजाय पुराने बंद रनवे पर उतर गया। इसी दौरान विमान रनवे पर लगे एप्रोच लाइट सिस्टम के कैट आई रिफ्लेक्टर से टकरा गया। टक्कर के बाद विमान क्षतिग्रस्त होकर रनवे पर फंस गया। घटना के वास्तविक कारण और लैंडिंग से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
विंग में घुसा कैट आई रिफ्लेक्टर, नोज सेक्शन भी हुआ क्षतिग्रस्त
हादसे के दौरान टक्कर इतनी तेज बताई गई कि कैट आई रिफ्लेक्टर विमान के विंग को नुकसान पहुंचाते हुए अंदर तक घुस गया। विमान के नोज सेक्शन को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
गनीमत रही कि हादसे में विमान में मौजूद किसी व्यक्ति की जान नहीं गई और सभी सुरक्षित रहे। एयर एंबुलेंस के क्षतिग्रस्त होकर रनवे पर फंसने के बाद एयरपोर्ट पर परिचालन प्रभावित हो गया।
घटना के बाद सुरक्षा और तकनीकी जांच शुरू की गई। विमान को हटाने और रनवे को परिचालन के लिए सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया में कई घंटे लगे।
अटेंडेंट ने सुनाया खौफनाक पल, तेज आवाज के बाद झटके खाने लगा विमान
एयर एंबुलेंस में मौजूद एक अटेंडेंट के अनुसार, लैंडिंग के दौरान अचानक तेज आवाज हुई और विमान झटके खाने लगा। इस दौरान अंदर मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया। अटेंडेंट के मुताबिक, रनवे किनारे लगी लाइटें विमान के विंग से टकराईं। कुछ देर बाद विमान धीरे-धीरे रुक गया और उसमें सवार लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, विमान को हुए नुकसान और लैंडिंग से जुड़े पूरे घटनाक्रम की तकनीकी जांच की जा रही है।
छह घंटे तक बंद रहा फ्लाइट ऑपरेशन, NOTAM कराया गया जारी
हादसे के बाद एयरपोर्ट डायरेक्टर ओपी सैनी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के माध्यम से NOTAM जारी कराया। इसके बाद हिसार एयरपोर्ट पर करीब छह घंटे तक फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित रहा। शाम करीब साढ़े चार बजे रनवे को क्लियर कर दिया गया। इसके बाद NOTAM समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। DGCA की जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि विमान पुराने रनवे पर कैसे पहुंचा, लैंडिंग के दौरान किस स्तर पर चूक हुई और एयर ट्रैफिक तथा ग्राउंड से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किस तरह किया गया।
हादसे से 20 मिनट पहले दूसरे विमान से सुरक्षित पहुंचा था परिवार
बताया गया है कि मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे डॉ. सुभाष चंद्रा के परिवार के कुछ सदस्य एक विशेष विमान से हिसार पहुंचे थे। यह विमान नए और चालू रनवे पर सुरक्षित उतरा। इसके करीब 20 से 25 मिनट बाद, सुबह 10:54 बजे नंद किशोर गोयनका का पार्थिव शरीर लेकर एयर एंबुलेंस हिसार एयरपोर्ट पहुंची। इसी विमान के लैंडिंग के दौरान हादसा हुआ। दोनों विमानों के लैंडिंग घटनाक्रम और एयरपोर्ट पर उस समय की परिचालन स्थितियां भी जांच का हिस्सा हो सकती हैं।
शोक जताने पहुंचे बाबा रामदेव के हेलिकॉप्टर को भी हुई परेशानी
नंद किशोर गोयनका के निधन पर शोक व्यक्त करने बाबा रामदेव हिसार पहुंचे थे। बताया गया है कि दोपहर में उनके हेलिकॉप्टर को हिसार एयरपोर्ट पर लैंडिंग की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद हेलिकॉप्टर HAU के गिरी सेंटर हेलीपैड पर उतरा।
वापसी के समय हेलिकॉप्टर के लिए ईंधन की जरूरत पड़ी। हिसार एयरपोर्ट से ईंधन मंगाने में एक घंटे से अधिक समय लग गया।
शाम करीब साढ़े छह बजे तक विजिबिलिटी कम हो गई। इसके बाद पायलट ने सुरक्षा कारणों से उड़ान भरने से इनकार कर दिया। आखिरकार बाबा रामदेव सड़क मार्ग से हरिद्वार के लिए रवाना हुए।
96 वर्ष की उम्र में नंद किशोर गोयनका का निधन, बुधवार को अंतिम संस्कार
नंद किशोर गोयनका का सोमवार को मुंबई में 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे।
मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर हिसार की मोहना मंडी स्थित पैतृक आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। बड़ी संख्या में परिवार के सदस्य, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और अन्य गणमान्य व्यक्ति श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
उनका अंतिम संस्कार बुधवार को अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान में किए जाने की जानकारी दी गई है।
पिता को याद कर भावुक हुए सुभाष चंद्रा, राष्ट्र और समाज सेवा को किया नमन
डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता को याद करते हुए उनके 96 वर्षों के जीवन को राष्ट्र और समाज सेवा के लिए समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि परिवार इस समय भावुक है, लेकिन उनके जीवन, संस्कार और सेवाभाव के प्रति कृतज्ञ भी है।
उन्होंने अपने पिता के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव, समाज सेवा और गौ सेवा के प्रति समर्पण को याद किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी डॉ. सुभाष चंद्रा को शोक संदेश भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
आदमपुर अनाज मंडी से शुरू किया सफर, अग्रोहा धाम के विकास में निभाई भूमिका
नंद किशोर गोयनका ने अपने कामकाजी जीवन की शुरुआत आदमपुर अनाज मंडी में आढ़त के कारोबार से की थी। वह अनाज की खरीद-फरोख्त और कमीशन एजेंसी के काम से जुड़े रहे।
वह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे और विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वैश्य समाज से जुड़े लोगों के अनुसार, उन्होंने अग्रोहा धाम के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से जुड़े रहे।
आर्थिक संकट में बेटे सुभाष चंद्रा ने छोड़ी थी पढ़ाई, पिता से सीखी व्यापार की बारीकियां
गोयनका परिवार का पैतृक आवास हिसार की मोहना मंडी में है। परिवार के संघर्ष के दौर में आर्थिक संकट आने पर डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर पिता के कारोबार में हाथ बंटाना शुरू किया था।
बताया जाता है कि नंद किशोर गोयनका ने ही उन्हें व्यापार की शुरुआती बारीकियां सिखाईं। बाद में डॉ. सुभाष चंद्रा ने मीडिया और कारोबारी क्षेत्र में अपना बड़ा व्यावसायिक समूह खड़ा किया।
Akhil Mahajan