पाक जासूसी केस में फंसी यूट्यूबर ज्योति जाएगी सुप्रीम कोर्ट
पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में हिसार जेल में बंद यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा अब सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर करेगी। हरियाणा और पंजाब के दो बेल केसों को आधार बनाया जाएगा।
पाक जासूसी केस में फंसी यूट्यूबर ज्योति अब जाएगी सुप्रीम कोर्ट
दो बार बेल खारिज होने के बाद हरियाणा-पंजाब के केस बनाएगी आधार
ऑपरेशन सिंदूर के बाद हिसार से हुई थी गिरफ्तारी
पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार ट्रैवल यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा अब जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। हिसार जेल में करीब एक साल से बंद ज्योति की जमानत याचिका दो बार खारिज हो चुकी है। ऐसे में अब उसकी कानूनी टीम देश की सर्वोच्च अदालत में बेल याचिका दाखिल करेगी।
ज्योति के वकील रविंद्र सिंह ढुल का कहना है कि हरियाणा और पंजाब में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार दो अन्य आरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में उन्हीं मामलों को आधार बनाकर ज्योति को भी राहत दिलाने की कोशिश की जाएगी। इन दोनों मामलों में भी पुलिस ने ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धाराएं लगाई थीं।
बता दें कि भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद हरियाणा और पंजाब में जासूसी नेटवर्क को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई थी। एयर स्ट्राइक के बाद सिर्फ 11 दिनों के भीतर दोनों राज्यों से 7 संदिग्ध जासूस गिरफ्तार किए गए थे। इनमें सबसे चर्चित मामला हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का रहा।
जांच एजेंसियों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध संपर्कों पर निगरानी बढ़ाई गई थी। कॉल रिकॉर्ड, चैटिंग और सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी के दौरान कई युवाओं के पाकिस्तान कनेक्शन सामने आए। ज्योति मल्होत्रा का नाम भी इसी जांच में सामने आया था।
पुलिस का दावा है कि ज्योति के पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी एहसान-उर-रहीम दानिश अली से संपर्क थे। जांच में पाकिस्तानी एजेंटों शाकिर, हसन अली और नासिर ढिल्लों के साथ भी नियमित बातचीत के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि ज्योति ने सैन्य गतिविधियों से जुड़े वीडियो और संवेदनशील लोकेशन की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाई।
ज्योति मल्होत्रा को 16 मई को हिसार में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। बाद में केंद्रीय एजेंसियों ने भी उससे कई दौर की पूछताछ की। जांच में यह दावा किया गया कि उसने कश्मीर डैम और राजस्थान बॉर्डर क्षेत्र के सैन्य शिविरों के वीडियो रिकॉर्ड कर पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुंचाए।
पुलिस के अनुसार पाकिस्तान यात्रा से पहले उसे ट्रैवल एडवाइजरी की जानकारी दी गई थी, लेकिन उसने उसका उल्लंघन किया। आरोप है कि उसने पाकिस्तानी एजेंटों के साथ मीटिंग की और संपर्क बनाए रखे। जांच एजेंसियों को उसके मोबाइल फोन से पाकिस्तान उच्चायोग से जुड़े अधिकारियों के साथ बातचीत के रिकॉर्ड भी मिले।
सुरक्षा एजेंसियों की नजर ज्योति पर तब गई जब वह साल 2024 में पहले पाकिस्तान और फिर चीन की यात्रा पर गई। रिकॉर्ड के मुताबिक वह 17 अप्रैल 2024 को पाकिस्तान गई थी और करीब एक महीने बाद भारत लौटी। इसके कुछ ही दिनों बाद वह चीन भी गई। इसके अलावा वह नेपाल भी पहुंची थी। करतारपुर कॉरिडोर यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तान पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ से भी हुई थी।
अब ज्योति की कानूनी टीम हरियाणा के कैथल निवासी दविंदर सिंह और पंजाब के पटियाला निवासी गुरप्रीत सिंह को मिली जमानत का हवाला सुप्रीम कोर्ट में देगी।
कैथल के दविंदर सिंह पर आरोप था कि वह पाकिस्तान के संपर्क में रहकर सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा कर रहा था। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत में पुलिस ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पुलिस के इकबालिया बयान के आधार पर गंभीर निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं मिला, जिसके बाद उसे जमानत दे दी गई।
वहीं पंजाब के पटियाला निवासी गुरप्रीत सिंह पर भी पाकिस्तान में फेसबुक संपर्क के जरिए गुप्त जानकारी साझा करने के आरोप लगे थे। अदालत में जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर सकी कि उसने देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी वास्तव में भेजी थी। इसी आधार पर उसे भी राहत मिल गई।
अब ज्योति मल्होत्रा की कानूनी टीम उम्मीद कर रही है कि समान परिस्थितियों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट से उसे भी जमानत मिल सकती है। हालांकि जांच एजेंसियां अब भी इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर केस मान रही हैं।
pooja