रोडरेज के दौरान 12वीं की छात्रा से बदसलूकी, कार से निकालने की कोशिश
गुरुग्राम में रोडरेज के दौरान 12वीं की छात्रा को कार से बाहर निकालने की कोशिश की गई। परिवार ने आरोप लगाया कि डायल 112 पर 20 कॉल के बाद पुलिस 37 मिनट देर से पहुंची।
गुरुग्राम में रोडरेज के दौरान 12वीं की छात्रा को कार से बाहर निकालने की कोशिश
डरी छात्रा ने कार में खुद को लॉक किया, मां-बेटी ने डायल 112 पर 20 बार कॉल की
परिवार का आरोप- पुलिस 37 मिनट बाद पहुंची, समझौते के लिए देने पड़े 2 हजार रुपए
हरियाणा के गुरुग्राम में एक बार फिर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोहना रोड पर रोडरेज की एक घटना के दौरान 12वीं कक्षा की छात्रा के साथ बदसलूकी और डराने-धमकाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मामूली टक्कर के बाद कई टैक्सी ड्राइवरों ने कार को घेर लिया और छात्रा को बाहर निकालने की कोशिश की।
घटना के दौरान डरी हुई छात्रा ने कार के अंदर खुद को सेंट्रल लॉक कर लिया और रोते हुए अपनी मां को वीडियो कॉल कर पूरी घटना की जानकारी दी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने मदद के लिए डायल 112 पर करीब 20 बार कॉल की, लेकिन पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंची।
जानकारी के अनुसार, सेक्टर-67 निवासी महिला की बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ती है। गुरुवार को वह अपनी सहेली के साथ परीक्षा देकर लौट रही थी। सहेली को पार्क व्यू सिटी-2 में छोड़ने के बाद वह कार ड्राइवर भूरी सिंह के साथ घर लौट रही थी। इसी दौरान सेक्टर-49 स्थित पार्क व्यू सिटी-2 के पास उनकी कार की एक कैब से हल्की टक्कर हो गई।
परिवार का आरोप है कि टक्कर के तुरंत बाद कैब ड्राइवर ने अपने अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया। कुछ ही देर में कई टैक्सी ड्राइवर वहां पहुंच गए और उन्होंने छात्रा की कार को चारों तरफ से घेर लिया। आरोपियों ने कार चालक भूरी सिंह को बाहर निकालकर उसके साथ हाथापाई और अभद्रता की।
महिला के मुताबिक, इसके बाद टैक्सी ड्राइवरों ने कार का दरवाजा खोलकर छात्रा को बाहर निकालने की कोशिश की। बार-बार दरवाजा खटखटाने और खोलने की कोशिश से छात्रा बुरी तरह डर गई। उसने तुरंत कार का सेंट्रल लॉक ऑन कर लिया और खुद को अंदर बंद कर लिया।
डरी हुई छात्रा ने अपनी मां को वीडियो कॉल की और पूरी घटना दिखाई। वीडियो कॉल में छात्रा रोती नजर आई। उसने खुद को असुरक्षित बताते हुए पुलिस कंट्रोल रूम में भी कॉल कर मदद मांगी।
महिला ने बताया कि उनकी बेटी ने पहली कॉल शाम 5 बजकर 2 मिनट पर की थी। इसके बाद करीब 5 बजकर 10 मिनट पर पुलिस की ओर से लोकेशन पूछने के लिए फोन आया, लेकिन मौके पर मदद नहीं पहुंची। मां-बेटी ने मिलकर करीब 20 बार डायल 112 पर कॉल की। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस करीब 37 मिनट बाद मौके पर पहुंची।
परिवार का कहना है कि अगर समय रहते पुलिस पहुंच जाती तो छात्रा को इतनी मानसिक प्रताड़ना नहीं झेलनी पड़ती। महिला ने आरोप लगाया कि जब उन्हें पुलिस की तरफ से तत्काल मदद नहीं मिली तो वह खुद अपने एक परिचित के साथ मौके पर पहुंचीं।
महिला के अनुसार, पुलिस की मौजूदगी में भी टैक्सी ड्राइवरों का रवैया सही नहीं था। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि पीछा छुड़ाने और मामला शांत करवाने के लिए उन्हें आरोपियों को 2 हजार रुपए देने पड़े। इसके बाद जाकर टैक्सी ड्राइवर वहां से हटे।
घटना के बाद महिला ने सोशल मीडिया पर पूरी घटना साझा की। उन्होंने लिखा कि यह घटना किसी भी बच्चे या बुजुर्ग के साथ हो सकती है और अगर शहर में समय पर पुलिस मदद नहीं पहुंचती तो लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद पुलिस की सोशल मीडिया टीम ने परिवार से संपर्क किया और मामले की जांच का आश्वासन दिया। हालांकि महिला का कहना है कि अगले दिन सुबह तक भी पुलिस की ओर से कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया गया था।
इस मामले में पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने कहा कि घटना सोशल मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आई है। मामले की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि पुलिस टीम को मौके पर पहुंचने में देरी क्यों हुई। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Akhil Mahajan