यूपी का गेहूं हरियाणा के किसानों के नाम पर बेच दिया, 5 फर्मों पर धोखाधड़ी का केस
करनाल की इंद्री और बियाना मंडी में यूपी का गेहूं हरियाणा किसानों के नाम पर पोर्टल में दर्ज करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने 5 फर्मों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
- करनाल की इंद्री मंडी में गेहूं खरीद घोटाले का खुलासा
- यूपी और बाहर राज्यों का गेहूं हरियाणा किसानों के नाम पर पोर्टल में चढ़ाया गया
- 5 फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में केस दर्ज, पुलिस जांच में जुटी
हरियाणा के करनाल जिले की इंद्री नई अनाज मंडी और बियाना सब यार्ड में गेहूं खरीद के दौरान बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से गेहूं लाकर उसे हरियाणा के किसानों के नाम पर ई-खरीद पोर्टल में दर्ज किया गया। इस पूरे खेल के जरिए सरकारी खरीद प्रणाली को नुकसान पहुंचाने और गलत तरीके से लाभ लेने का आरोप लगा है।
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने पांच फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई इंद्री मार्केट कमेटी के सचिव अजीत सिंह की शिकायत के आधार पर की गई है।
जानकारी के अनुसार गेहूं खरीद सीजन 2026 के दौरान नई अनाज मंडी इंद्री और बियाना सब यार्ड में खरीद प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और स्थानीय स्तर पर पूछताछ की। जांच के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं।
अधिकारियों की जांच में पाया गया कि कुछ कमीशन एजेंट उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों से गेहूं मंगवा रहे थे। इसके बाद उस गेहूं को हरियाणा के किसानों के नाम पर ई-खरीद पोर्टल में दर्ज किया जा रहा था। इससे संबंधित फर्मों को गलत तरीके से आर्थिक फायदा पहुंचाया गया, जबकि सरकारी खरीद प्रणाली को नुकसान हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि मंडी के नियमों को ताक पर रखकर ट्रांसपोर्ट ड्राइवरों को पैसे देकर गेहूं की बोरियों को प्राथमिकता से उठवाया जाता था। आरोप है कि कुछ आढ़तियों ने अवैध लेनदेन के जरिए अपने माल की पहले लिफ्टिंग करवाई।
ट्रांसपोर्ट कंपनी मैसर्स नरवाल कंपनी के लिखित बयान में भी इस तरह के अवैध लेनदेन की पुष्टि हुई है। बयान के अनुसार कुछ ड्राइवरों और आढ़तियों के बीच पैसे का लेनदेन होता था, जिसके बाद गेहूं की उठान में प्राथमिकता दी जाती थी।
जांच में अधिकारियों ने चार बड़े खुलासे किए हैं। पहला, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से गेहूं लाकर इंद्री और बियाना मंडी में बेचा गया। दूसरा, इस गेहूं को हरियाणा के किसानों के नाम पर ई-खरीद पोर्टल में दर्ज किया गया। तीसरा, गेहूं की बोरियों को पहले उठवाने के लिए अवैध रूप से पैसे दिए गए। चौथा, पूरी प्रक्रिया में सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और नियमों का उल्लंघन किया गया।
पुलिस ने जिन पांच फर्मों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें मैसर्स जसमेर सिंह जरनैल सिंह, मैसर्स सरधा राम जय भगवान, मैसर्स राम सरूप रतन लाल, मैसर्स अमर सिंह राय सिंह और मैसर्स मूनक एंटरप्राइजेज शामिल हैं।
जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित फर्मों ने अपने लाइसेंस की शर्तों का भी उल्लंघन किया। अधिकारियों के अनुसार कई नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
इस पूरे मामले ने सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से सरकारी एजेंसियों को आर्थिक नुकसान हुआ है और खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
फिलहाल थाना इंद्री पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मंडी सचिव द्वारा भेजे गए दस्तावेज, नोटिस, सस्पेंशन ऑर्डर और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
Akhil Mahajan