ऑटो चालक की बेटी बनी दुनिया की नंबर-1 बॉक्सर, रोहतक की मीनाक्षी ने रचा इतिहास
रोहतक की मीनाक्षी हुड्डा लगातार दूसरी बार विश्व की नंबर-1 बॉक्सर बनी हैं। ऑटो चालक की बेटी ने 48 किलोग्राम वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया।
- रोहतक की मीनाक्षी हुड्डा लगातार दूसरी बार विश्व की नंबर-1 बॉक्सर बनीं
- 48 किलोग्राम भार वर्ग में वर्ल्ड बॉक्सिंग फेडरेशन रैंकिंग में हासिल किया शीर्ष स्थान
- ऑटो चालक की बेटी ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड जीतकर बढ़ाया देश का मान
हरियाणा के रोहतक जिले के रूड़की गांव की बेटी मीनाक्षी हुड्डा ने एक बार फिर देश और प्रदेश का नाम दुनिया भर में रोशन कर दिया है। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखने वाली मीनाक्षी ने लगातार दूसरी बार विश्व की नंबर-1 मुक्केबाज बनने का गौरव हासिल किया है।
वर्ल्ड बॉक्सिंग फेडरेशन की हालिया रैंकिंग में 48 किलोग्राम भार वर्ग में मीनाक्षी हुड्डा को दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी घोषित किया गया है। इससे पहले भी वह इस रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल कर चुकी हैं। लगातार दूसरी बार नंबर-1 बनने की उपलब्धि ने उन्हें भारतीय मुक्केबाजी की सबसे चमकदार प्रतिभाओं में शामिल कर दिया है।
मीनाक्षी का यह सफर आसान नहीं रहा। एक साधारण परिवार से आने वाली मीनाक्षी के पिता कृष्ण हुड्डा ऑटो चालक हैं, जबकि उनकी मां सुनीता गृहिणी हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने बेटी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। आज उसी मेहनत का परिणाम पूरी दुनिया देख रही है।
मीनाक्षी ने वर्ष 2013 में अपने गांव में कोच विजय हुड्डा के मार्गदर्शन में मुक्केबाजी की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्हें सामाजिक तानों और कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
पिछले एक वर्ष में मीनाक्षी ने लगातार चार बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। हाल ही में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी कप में भी गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
वहीं एक अन्य वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि इंग्लैंड में आयोजित विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में देखने को मिली, जहां उन्होंने फाइनल मुकाबले में कजाकिस्तान की चार बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता नाजिम काइजेबे को हराकर स्वर्ण पदक जीता था।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मीनाक्षी का रिकॉर्ड शानदार रहा है। वह वर्ष 2023 और 2024 में लगातार दो बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीते हैं। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर वर्ष 2023 की एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। वहीं इलरोडा कप और ब्रिक्स प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
आज मीनाक्षी हुड्डा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका संघर्ष यह साबित करता है कि मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
pooja