भिवानी–फतेहाबाद पुलिस प्रताड़ना केस: NHRC ने हरियाणा गृह विभाग को नोटिस
भिवानी और फतेहाबाद पुलिस प्रताड़ना केस में कार्रवाई न होने पर NHRC ने हरियाणा गृह विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया। दो सप्ताह में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी।
• भिवानी और फतेहाबाद पुलिस प्रताड़ना केस में हरियाणा गृह विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस
• स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के आदेश लागू न होने पर NHRC ने मांगी 2 सप्ताह में रिपोर्ट
• पेट्रोल डालकर यातना देने वाले आरोपी पुलिसकर्मी को सजा की जगह पदोन्नति देने पर बड़ा सवाल
हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद में पुलिस अत्याचार से जुड़े दो गंभीर मामलों में कार्रवाई न होने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हरियाणा सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के आदेशों को लागू न करने को लेकर जारी हुआ है। खास बात यह है कि यह विभाग मुख्यमंत्री नायब सैनी के पास है।
शिकायतकर्ता और हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने कहा कि दोनों मामलों में दोषी पुलिसकर्मियों पर न तो एफआईआर हुई और न ही निलंबन, जबकि अथॉरिटी ने साफ निर्देश दिए थे। उनकी शिकायत पर NHRC ने संज्ञान लेकर दो सप्ताह में एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करवाने का आदेश दिया है।
शिकायत के अनुसार जून 2023 में भिवानी के गांव बामला के 19 वर्षीय युवक को पुलिस हिरासत में बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। आरोप है कि एएसआई दशरथ और अन्य पुलिस कर्मियों ने उसके निजी अंगों में पेट्रोल डाला।
एक साल की जांच के बाद 24 सितंबर 2024 को पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी ने दोष सिद्ध कर निलंबन और FIR दर्ज करने के आदेश दिए, लेकिन गृह विभाग ने आदेश लागू करने की बजाय एएसआई दशरथ को पदोन्नति देकर एसआई बना दिया।
यही नहीं, उसे दीनोद गेट चौकी का इंचार्ज भी नियुक्त कर दिया गया — वहीं चौकी, जहां अत्याचार हुआ था।
फतेहाबाद के भूना निवासी ज्वेलर नरेश सोनी ने आरोप लगाया कि 17 अप्रैल 2023 को सीआईए टीम ने झूठे सट्टेबाजी केस में फंसाकर रकम की वसूली की कोशिश की। उनका आरोप है कि सीआईए इंचार्ज ने जेब से 40 हजार रुपए लिए, 5 लाख की मांग की और धमकी दी।
राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने 25 सितंबर 2024 को तत्कालीन इंस्पेक्टर कपिल सिहाग सहित 5 पुलिस कर्मियों पर FIR दर्ज करने, और DSP भूना को चेतावनी देने के निर्देश दिए।
लेकिन गृह विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के बाद गृह विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया गया। आयोग ने कहा कि आरोप मानवाधिकार और सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देशों के उल्लंघन का संकेत देते हैं और पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास दिखाते हैं। आयोग ने दो सप्ताह में विस्तृत ATR (Action Taken Report) मांगी है।
इस प्रकरण के बाद दोनों जिलों में चर्चा है कि आखिर न्यायिक आदेशों को दरकिनार कर पुलिसकर्मियों को संरक्षण क्यों दिया गया? पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लिए NHRC की कार्रवाई को राहत मान रहा है।
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