₹590 करोड़ कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला, हरियाणा सरकार ने ACB को सौंपी जांच
हरियाणा सरकार ने ₹590 करोड़ के कोटक महिंद्रा बैंक एफडी घोटाले की जांच एसीबी को सौंप दी है। पंचकूला नगर निगम की 5 एफडी का बैंक में रिकॉर्ड नहीं मिला।
■ ₹590 करोड़ कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला ACB को सौंपा
■ नगर निगम की 5 एफडी का बैंक में रिकॉर्ड नहीं मिला
■ सरकार ने FIR दर्ज कर जांच के दिए आदेश
हरियाणा में सरकारी विभागों से जुड़े ₹590 करोड़ के कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में बड़ा एक्शन हुआ है। हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यह घोटाला पंचकूला नगर निगम की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ा हुआ है, जिसमें करोड़ों रुपए की रकम का बैंक रिकॉर्ड ही नहीं मिला।
जानकारी के अनुसार पंचकूला नगर निगम ने सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक शाखा में अपना अकाउंट खुलवाया था, जिसमें नगर निगम की 16 एफडी इसी ब्रांच में करवाई गई थीं। ये एफडी पहले एसबीआई बैंक से ट्रांसफर करवाई गई थीं, लेकिन जब हाल ही में नगर निगम ने एफडी मैच्योर होने पर रकम वापस मांगी तो बैंक ने जवाब दिया कि इन नंबरों की कोई एफडी बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है। यह जवाब मिलते ही नगर निगम में हड़कंप मच गया।
इसके बाद नगर निगम ने एक जांच टीम गठित की, जिसमें अकाउंट अफसर, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर शामिल थे। जांच में सामने आया कि 16 में से 5 एफडी का बैंक में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिसके बाद पूरे मामले की रिपोर्ट हरियाणा सरकार और बैंक को भेजी गई। अब इस मामले में बैंक की पूर्व कर्मी स्वाति और पुष्पिंद्र का नाम सामने आ रहा है।
जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए बैंक कर्मियों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया। नगर निगम के नाम पर बैंक में 2 असली खाते खोले गए, लेकिन उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 2 और फर्जी खाते खोल दिए गए। बाद में एफडी की रकम इन खातों से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई। बताया जा रहा है कि बैंक से जुड़ी एक महिला के खाते में भी बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है।
सबसे बड़ी बात यह रही कि बैंक हर साल एफडी रिन्यूअल के डॉक्यूमेंट नगर निगम को भेजता रहा, जिससे अधिकारियों को लगा कि उनकी एफडी सुरक्षित है। अधिकारियों ने कभी बैंक जाकर अकाउंट और एफडी की फिजिकल जांच नहीं की, जिसका फायदा उठाकर घोटाले को लंबे समय तक छुपाया गया।
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा के अन्य सरकारी विभागों में फ्रॉड के मामले सामने आए और नगर निगम ने भी अपनी एफडी की रकम वापस मांग ली। बैंक की तरफ से रिकॉर्ड नहीं होने की बात सामने आने पर पूरा मामला उजागर हो गया। बताया जा रहा है कि बाद में बैंक से जुड़ा एक कर्मचारी नगर निगम पहुंचा और ज्यादा ब्याज दर पर फिर से एफडी कराने का ऑफर दिया, लेकिन इस बार अधिकारी झांसे में नहीं आए और मामला खुल गया। अब हरियाणा सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच ACB को सौंप दी है और जल्द एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
shubham