पर्ल्स लैंड घोटाले में पंचकूला के DRO गिरफ्तार, 2.40 करोड़ कैश छिपाने का आरोप; 7 दिन के रिमांड पर ACB

पर्ल्स लैंड केस में एसीबी ने पंचकूला के डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर जोगिंद्र शर्मा को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने 2.40 करोड़ रुपये तीन राज्यों में छिपाए हैं। कोर्ट ने उसे सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है।

पर्ल्स लैंड घोटाले में पंचकूला के DRO गिरफ्तार, 2.40 करोड़ कैश छिपाने का आरोप; 7 दिन के रिमांड पर ACB

➤ एसीबी ने पंचकूला के डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर जोगिंद्र शर्मा को किया गिरफ्तार

➤ जांच में 2.40 करोड़ रुपये की कथित रकम दिल्ली, मनाली और भिवानी में छिपाने का दावा

➤ तहसीलदार विक्रम सिंगला ने पूछताछ में DRO को बताया अपना पार्टनर, रिश्तेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में


पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर (DRO) जोगिंद्र शर्मा को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने चर्चित पर्ल्स लैंड केस में गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस कथित घोटाले में जोगिंद्र शर्मा के हिस्से 2.40 करोड़ रुपये आए थे, जिन्हें उसने दिल्ली, मनाली और भिवानी में अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखा है। अदालत ने आरोपी को 7 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जिसके दौरान एसीबी छिपाई गई रकम और अन्य सबूत जुटाने का प्रयास करेगी।

डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को एसीबी ने सात दिन की रिमांड पर लिया है।

जांच के दौरान एसीबी को यह भी जानकारी मिली कि जोगिंद्र शर्मा का मोबाइल फोन पिछले करीब आठ महीने से बंद है। जांच एजेंसी का दावा है कि मोबाइल राजस्थान के सालासर में उसके रिश्तेदारों के पास छिपाया गया है। अब टीम मोबाइल की बरामदगी के साथ डिजिटल साक्ष्य जुटाने की तैयारी में है।

तहसीलदार विक्रम सिंगला को कोर्ट में पेश करने ले जाते हुए एसीबी टीम। फाइल

रिश्तेदारों और अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच में

एसीबी अब जोगिंद्र शर्मा के भिवानी जिले के कुड़ल गांव निवासी रिश्तेदार नवीन और दिनेश की भूमिका की भी जांच करेगी। इसके अलावा पहले से गिरफ्तार तहसीलदार विक्रम सिंगला और जोगिंद्र शर्मा को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन से सरकारी अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे।

क्या है पूरा पर्ल्स लैंड मामला

जांच एजेंसी के अनुसार 2 जनवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 दर्ज की गई थीं। इन दस्तावेजों में 17.55 एकड़ जमीन को करीब 4.20 करोड़ रुपये में बेचा जाना दर्शाया गया। इसके बाद 9 जनवरी को इंतकाल दर्ज हुआ और 17 जनवरी को कानूनगो तथा तहसीलदार स्तर से उसे मंजूरी भी दे दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि इस जमीन को लेकर पहले से शिकायतें और पत्राचार हो चुके थे। एसडीएम पंचकूला ने संबंधित मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा था। वहीं हिसार के एक शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि यह जमीन पर्ल्स ग्रुप से जुड़ी है और इस पर लोढ़ा आयोग की रोक होने के कारण इसकी रजिस्ट्री नहीं हो सकती थी। इसके बावजूद कथित तौर पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

तीन अहम बिंदुओं से खुली जांच की परतें

जांच के दौरान एसीबी को जमीन खरीदने वाले पक्ष से जुड़े लोगों और जोगिंद्र शर्मा के बीच फोन कॉल रिकॉर्ड मिले। एजेंसी का आरोप है कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद आरोपी ने अपना मोबाइल जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराया, जिससे वैज्ञानिक जांच प्रभावित हुई। वहीं पहले गिरफ्तार तहसीलदार विक्रम सिंगला ने पूछताछ में दावा किया कि इस पूरे मामले में जोगिंद्र शर्मा उसका साझेदार था और कथित मुनाफे में उसका भी हिस्सा तय था। अब एसीबी इन सभी तथ्यों की पुष्टि के लिए आगे की पूछताछ कर रही है।