लोन रिकवरी में सुस्ती पर हाईकोर्ट सख्त, पानीपत DC-SP को 30 दिन में बैंक को कब्जा दिलाने के आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पानीपत DC-SP को 30 दिन में बैंक को बंधक संपत्ति का कब्जा दिलाने और 45 दिन में अनुपालन रिपोर्ट देने के आदेश दिए।

लोन रिकवरी में सुस्ती पर हाईकोर्ट सख्त, पानीपत DC-SP को 30 दिन में बैंक को कब्जा दिलाने के आदेश

हाईकोर्ट ने पानीपत DC-SP को 30 दिन में बंधक संपत्ति का कब्जा दिलाने को कहा
17 दिसंबर 2025 के आदेश के बाद भी कब्जा न मिलने पर कोर्ट ने जताई हैरानी
अधिकारियों को 45 दिन में अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट की रजिस्ट्री में देनी होगी


पानीपत। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने लोन रिकवरी के मामलों में जिला प्रशासन की सुस्ती पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पानीपत के डिप्टी कमिश्नर (DC) और एसपी (SP) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि बैंक को उसकी बंधक संपत्ति का भौतिक कब्जा 30 दिनों के भीतर दिलाया जाए। कोर्ट ने अधिकारियों को बैंक को तत्काल पुलिस सहायता और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि जिला मजिस्ट्रेट की ओर से 17 दिसंबर 2025 को सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत आदेश जारी किए जाने के बावजूद बैंक को संबंधित संपत्ति का कब्जा नहीं दिलाया गया। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

NPA को लेकर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बैंकिंग व्यवस्था और देश के खजाने पर भारी बोझ हैं। कोर्ट के अनुसार, सरफेसी एक्ट के तहत रिकवरी प्रक्रिया में तेजी लाना जरूरी है, क्योंकि इससे सिस्टम में नकदी बनाए रखने में मदद मिलती है। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों द्वारा अपनी वैधानिक जिम्मेदारी नहीं निभाना लापरवाही को दर्शाता है।

मामले में अदालत ने जिला प्रशासन की ओर से बंधक संपत्ति का कब्जा बैंक को दिलाने में हुई देरी को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पहले ही सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत आदेश जारी किया जा चुका था, तो उसके बाद भी बैंक को संपत्ति का भौतिक कब्जा नहीं मिलना हैरान करने वाला है।

30 दिन में बैंक को सौंपना होगा भौतिक कब्जा

हाईकोर्ट ने रिट ऑफ मंडामस जारी करते हुए जिला मजिस्ट्रेट प्रतिवादी, डिप्टी कमिश्नर और एसपी पानीपत को निर्देश दिए कि बैंक को तुरंत पुलिस सहायता और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित संपत्ति का भौतिक कब्जा 30 दिनों के भीतर बैंक को सौंपा जाए।

कब्जा मिलने के बाद बैंक नियमानुसार अपनी बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा। अदालत के निर्देशों में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करते हुए कब्जा दिलाने की समयसीमा भी तय कर दी गई है।

45 दिन में कोर्ट में जमा करनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने केवल संपत्ति का कब्जा दिलाने का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि अधिकारियों को इस आदेश की पालना की जानकारी अदालत के सामने रखने के लिए भी समयसीमा तय की है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी 45 दिनों के भीतर आदेश की अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराएं।

इस तरह हाईकोर्ट ने लोन रिकवरी से जुड़े मामले में जिला प्रशासन की देरी को गंभीरता से लेते हुए एक ओर बैंक को बंधक संपत्ति का कब्जा दिलाने के लिए 30 दिन की समयसीमा तय की है, वहीं दूसरी ओर 45 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देकर अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की है।