दवाइयों की कमी़, सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट में अनावश्यक देरी, लंबी लाइनें - स्वास्थ्य मंत्री ने औचक निरीक्षण में पाई खामियां
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने PGI रोहतक के औचक निरीक्षण में दवाइयों की कमी, गंदगी और जांच में देरी जैसी गंभीर खामियां पाईं और सुधार के सख्त निर्देश दिए।
■ हेल्थ मिनिस्टर आरती राव ने PGI रोहतक का किया औचक निरीक्षण
■ दवाइयों की भारी कमी और मरीजों की लंबी कतारें मिलीं
■ सफाई व्यवस्था और जांच सेवाओं में देरी पर दिए सुधार के आदेश
हरियाणा के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान PGI रोहतक में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने पहली बार विभाग संभालने के बाद औचक निरीक्षण किया। इस दौरे की किसी को पूर्व सूचना नहीं थी, जिसके चलते डॉक्टरों से लेकर अन्य स्टाफ तक में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। करीब दो घंटे तक चले इस निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा और कई गंभीर खामियों को उजागर किया।
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी समस्या दवाइयों की कमी के रूप में सामने आई। मंत्री ने पाया कि दूर-दराज से इलाज कराने आए मरीज लंबी कतारों में खड़े हैं, लेकिन उन्हें समय पर दवाइयां और नंबर नहीं मिल पा रहा। कई मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी विफलता को दर्शाता है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने तत्काल प्रभाव से दवा वितरण के लिए एक के बजाय दो खिड़कियां खोलने के निर्देश दिए।
मंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार की ओर से करीब 520 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं, लेकिन PGI में केवल करीब 200 दवाइयां ही उपलब्ध होना गंभीर लापरवाही है। जब इस बारे में फार्मा विभाग से जवाब मांगा गया तो स्थिति और भी चिंताजनक सामने आई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयों की ही खरीद हो रही है, जबकि जरूरी दवाइयों का स्टॉक पर्याप्त नहीं है। इस पूरे मामले को उन्होंने बड़े स्तर की लापरवाही बताते हुए जांच के आदेश देने की बात कही।
इसके अलावा अस्पताल में सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। खासकर शौचालयों में गंदगी मिलने पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि अस्पताल जैसी जगह पर स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
मंत्री के निरीक्षण में यह भी सामने आया कि सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध करवाई जाए ताकि मरीजों को जल्द इलाज मिल सके।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए करीब 400 डॉक्टरों की भर्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे जल्द पूरा किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार उनकी प्राथमिकता है और लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में किसी प्रकार का पेपर घोटाला नहीं हुआ है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सरकार की मंशा साफ होती है।
Akhil Mahajan