राखीगढ़ी में खुदाई से मिले 2 कंकाल, हड़प्पा सभ्यता के राज खोलेंगे DNA सैंपल

हिसार के राखीगढ़ी में खुदाई के दौरान 2 मानव कंकाल मिले, जिनका DNA परीक्षण हड़प्पा सभ्यता के रहस्यों को उजागर करेगा।

राखीगढ़ी में खुदाई से मिले 2 कंकाल, हड़प्पा सभ्यता के राज खोलेंगे DNA सैंपल

➤ खुदाई में मिले 2 मानव कंकाल, साथ में खास बर्तन भी मिले
➤ पहली बार ‘डिश ऑन स्टैंड’ और पक्की ईंटों के संकेत
➤ DNA जांच से हड़प्पा काल के जीवन पर खुलेंगे नए राज


हरियाणा के हिसार जिले स्थित राखीगढ़ी में चल रही पुरातात्विक खुदाई ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों को खोलने की दिशा में बड़ा संकेत दिया है। विश्व की प्रमुख हड़प्पा सभ्यता स्थलों में शामिल इस साइट के टीला-7 पर दो मानव कंकाल मिले हैं, जिससे हजारों साल पुरानी सभ्यता के रहस्यों पर नई रोशनी पड़ने की उम्मीद बढ़ गई है।

खुदाई के दौरान इन कंकालों के साथ छोटे-बड़े बर्तन भी मिले हैं, जो अंतिम संस्कार के समय रखे जाने की परंपरा की ओर इशारा करते हैं। खास बात यह है कि पहली बार ‘डिश ऑन स्टैंड’ भी मिला है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ये कंकाल किसी समृद्ध या उच्च वर्ग के व्यक्ति के हो सकते हैं। इसके अलावा कंकालों के पास पक्की ईंटों के अवशेष भी मिले हैं, जो अब तक के शोध में दुर्लभ माने जाते हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन बर्तनों के नीचे और भी कंकाल मिलने की संभावना है। जितने भी कंकाल अच्छी स्थिति में मिलेंगे, उनका DNA सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उस समय के लोग कैसे दिखते थे, उनका जीवन स्तर क्या था और वे यहां कब आकर बसे।

राखीगढ़ी में इससे पहले भी कई बार खुदाई हो चुकी है। 1997-98 में डॉ. अमरेंद्र नाथ के नेतृत्व में पहली खुदाई में 10 कंकाल मिले थे। इसके बाद 2013 से 2016 के बीच Deccan College Post-Graduate and Research Institute के प्रोफेसर वसंत शिंदे के नेतृत्व में हुई खुदाई में करीब 60 कंकाल मिले थे। इनमें से कुछ कंकालों का DNA परीक्षण किया गया, जिसमें एक कंकाल की रिपोर्ट से यह सामने आया कि वह करीब 4500 साल पुराना है।

2020 में हुई खुदाई के दौरान मिले कंकालों के DNA सैंपल लिए गए थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। खास बात यह है कि अब तक DNA विश्लेषण मुख्य रूप से टीला-7 के कंकालों पर ही सफल रहा है।

हालांकि, टीला-7 का क्षेत्र अभी तक पूरी तरह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन नहीं आया है। यहां किसान अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती कर रहे हैं, जिससे कई कंकालों को नुकसान भी पहुंचा है। कीटनाशकों और सिंचाई के कारण अवशेषों के नष्ट होने का खतरा बना हुआ है।

फिलहाल खुदाई बेहद सावधानी से की जा रही है और शुरुआती तौर पर मिले इन दो कंकालों की सफाई और संरक्षण का काम जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यहां से और भी महत्वपूर्ण अवशेष मिल सकते हैं, जो मानव इतिहास की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक के बारे में नई जानकारी देंगे।