जमीन विवाद पर घमासान, पूर्व गृहमंत्री सुभाष बतरा और विधायक बीबी बतरा को 50-50 लाख का नोटिस

रोहतक में आईएमटी के पास स्थित जमीन विवाद में हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड ने पूर्व गृहमंत्री सुभाष बतरा और विधायक बीबी बतरा को 50-50 लाख रुपये का कानूनी नोटिस भेजा है। कंपनी का कहना है कि जमीन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदी गई है।

जमीन विवाद पर घमासान, पूर्व गृहमंत्री सुभाष बतरा और विधायक बीबी बतरा को  50-50 लाख का नोटिस

हरियाणा टेलिकॉम जमीन विवाद में सुभाष बतरा और बीबी बतरा को 50-50 लाख का नोटिस
कंपनी का दावा: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठा रहे बतरा, माफी मांगें या कानूनी कार्रवाई झेलें
आईएमटी के पास 20 एकड़ जमीन कानूनी प्रक्रिया से खरीदी गई, सभी दावेदार कोर्ट में हार चुके


रोहतक में आईएमटी के पास स्थित जमीन से जुड़े मामले में  हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड के अधिकारियों ने पूर्व गृहमंत्री सुभाष बतरा और रोहतक के विधायक बीबी बतरा को 50-50 लाख रुपये का कानूनी नोटिस भेजा है। कंपनी का आरोप है कि दोनों नेता जमीन को लेकर भ्रामक और गलत बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे कंपनी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। नोटिस में कहा गया है कि या तो दोनों नेता सार्वजनिक रूप से माफी मांगें या फिर कानूनी कार्रवाई का सामना करें

कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदी और मंजूर की गई है। कंपनी के मुताबिक उनका प्लान सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर मंजूर हुआ है और सभी आवश्यक सरकारी अनुमति और एनओसी भी प्राप्त हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे में सुभाष बतरा और बीबी बतरा के बयान न केवल भ्रामक हैं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल खड़े करने जैसे हैं

कंपनी के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि बीबी बतरा ने इस मामले को लेकर विधानसभा में भी गलत जानकारी दी, जिससे लोगों में भ्रम फैल रहा है। अधिकारियों के अनुसार जमीन से जुड़ा हर दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। इसलिए जनता को ऐसे बयानों से भ्रमित नहीं होना चाहिए।

अधिकारियों ने बताया कि इस जमीन को लेकर पहले भी कई आपत्तियां और विवाद सामने आए थे। विभाग और अन्य आपत्ति जताने वाले पक्षों ने कोर्ट में केस दायर किए, लेकिन सभी मामलों में फैसला कंपनी के पक्ष में आया। अधिकारियों का कहना है कि विभाग चार बार अदालत में मामला हार चुका है और सभी संबंधित पक्षों को उनके क्लेम भी दिए जा चुके हैं।

दरअसल, आईएमटी के पास करीब 20 एकड़ जमीन पर पहले हरियाणा टेलिकॉम कंपनी लिमिटेड स्थापित थी। यह जमीन 1988 से इसी कंपनी के पास थी। वर्ष 2020 में कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया गया, जिसके बाद कंपनी से जुड़े लेनदार और विभाग अपने-अपने दावे लेकर अदालत पहुंच गए। यह मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में चला गया, जहां अदालत ने एक अधिकारी नियुक्त किया ताकि सभी दावों का समाधान किया जा सके।

इसके बाद कंपनी को कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत रखा गया और सभी लेनदारों से क्लेम मांगे गए। विभाग ने भी अपना दावा प्रस्तुत किया। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने खुले तौर पर बोली प्रक्रिया शुरू की, जिसके लिए अखबारों में विज्ञापन भी प्रकाशित किए गए।

इस बोली प्रक्रिया में कुल तीन खरीदार सामने आए, जिनमें से कंपनी ने 25 करोड़ 14 लाख रुपये की सबसे अधिक बोली लगाई। इसके बाद सभी लेनदारों से आपत्तियां मांगी गईं और 31 अक्टूबर 2020 को सभी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। पूरे प्लान को सरकारी अधिकारी द्वारा NCLT में प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद इसे कानूनी मंजूरी मिल गई।

कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक 5 मार्च 2021 को विभाग ने इस मंजूरी पर आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया। कंपनी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट तक से मंजूरी मिल चुकी है, इसलिए अब इस जमीन को लेकर सवाल उठाना पूरी तरह गलत है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद रोहतक की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। कंपनी ने साफ कहा है कि अगर दोनों नेता अपने बयान वापस लेकर माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।