पानी सप्लाई की लीकेज व टैंकों में मरे मेंढक होने से फैला काला पीलिया, हर गली में बीमार; विधायक आदित्य सुरजेवाला ने घेरा

कलायत क्षेत्र के सजुमा गांव में ग्रामीणों ने दूषित पेयजल के कारण पीलिया और हेपेटाइटिस के मामले बढ़ने का दावा किया है। जनस्वास्थ्य विभाग ने पानी के नमूने लिए, जबकि विधायक आदित्य सुरजेवाला ने गांव पहुंचकर स्वच्छ पेयजल और मेडिकल कैंप की मांग उठाई।

पानी सप्लाई की लीकेज व टैंकों में मरे मेंढक होने से फैला काला पीलिया, हर गली में बीमार; विधायक आदित्य सुरजेवाला ने घेरा

➤ ग्रामीणों का दावा- गांव में हेपेटाइटिस और पीलिया के मामले बढ़े, दूषित पेयजल को बताया बड़ी वजह
वाटर टैंकों में गंदगी और पाइपलाइनों में लीकेज के आरोप, जनस्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया निरीक्षण
विधायक आदित्य सुरजेवाला ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर मेडिकल कैंप और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था की मांग उठाई


कैथल। कलायत विधानसभा क्षेत्र के गांव सजुमा में दूषित पेयजल और बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव के अलग-अलग हिस्सों में हेपेटाइटिस और पीलिया से संबंधित मामले सामने आ रहे हैं और बीमार लोगों की संख्या बढ़ रही है। ग्रामीणों ने इसके लिए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की कथित बदहाली को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि वाटर सप्लाई टैंकों की नियमित सफाई नहीं होने और पाइपलाइनों में लीकेज के कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है।

मामला सामने आने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम ने गांव पहुंचकर वाटर सप्लाई व्यवस्था का निरीक्षण किया और पानी के नमूने लिए। वहीं कैथल विधायक आदित्य सुरजेवाला ने भी गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और सरकार तथा संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। हालांकि गांव में बीमारी के वास्तविक कारण और मामलों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच तथा मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सप्लाई किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। उनका दावा है कि वाटर सप्लाई टैंकों में गंदगी और हरी काई जमा है तथा सफाई व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।

कुछ ग्रामीणों ने टैंकों में मृत मेंढक मिलने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति के बावजूद पानी की आपूर्ति जारी रहने से लोगों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। इन दावों की आधिकारिक जांच और पानी के नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है।

ग्रामीणों ने पेयजल की मुख्य पाइपलाइनों में कई स्थानों पर लीकेज होने की शिकायत भी की है। उनका आरोप है कि लीकेज के कारण आसपास का गंदा पानी पाइपलाइन में मिलने की आशंका बनी रहती है और यही पानी घरों तक पहुंच रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर संबंधित विभाग को पहले भी अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने से स्थिति गंभीर होती गई। अब बीमारी के मामले सामने आने के दावों के बाद ग्रामीणों ने पाइपलाइन नेटवर्क की व्यापक जांच और मरम्मत की मांग की है।

मामला सामने आने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी टीम के साथ सजुमा गांव पहुंचे। अधिकारियों ने पेयजल आपूर्ति से जुड़े टैंकों और शिकायत वाले स्थानों का निरीक्षण किया।

विभागीय टीम ने जांच के लिए पानी के नमूने भी लिए हैं। ग्रामीणों को टैंकों की सफाई और पेयजल व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। अब पानी की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।

मामले की जानकारी मिलने के बाद कैथल विधायक आदित्य सुरजेवाला सजुमा गांव पहुंचे। उन्होंने वाटर सप्लाई टैंकों और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सुनीं।

सुरजेवाला ने पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

विधायक आदित्य सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि यदि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा और वाटर टैंकों की स्थिति खराब है तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पेयजल टैंकों की तत्काल सफाई, पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत और गांव में स्वच्छ पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

विधायक ने स्वास्थ्य विभाग से गांव में मेडिकल कैंप आयोजित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए और बीमारी से प्रभावित लोगों को आवश्यक उपचार तथा दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं।

ग्रामीणों ने भी व्यापक स्वास्थ्य जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि बीमारी के मामलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए घर-घर सर्वे और मेडिकल जांच जरूरी है।

गांव में सामने आ रहे बीमारी के मामलों को ग्रामीण दूषित पेयजल से जोड़ रहे हैं, लेकिन पानी की जांच रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सकीय जांच के बाद ही संक्रमण के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि जांच पूरी होने का इंतजार किए बिना एहतियात के तौर पर स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, टैंकों की सफाई कराई जाए और सभी लीकेज को दुरुस्त किया जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पेयजल समस्या का जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

अब निगाहें पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था चाहिए।