अभय चौटाला के बयान पर दिग्विजय का पलटवार, बोले- चिट्टा-अफीम कौन बेचता है सब जानते हैं
अभय चौटाला के 2024 चुनावी हार वाले बयान पर दिग्विजय चौटाला ने पलटवार किया। चौटाला गांव में चिट्टा-अफीम और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।
➤ अभय चौटाला ने कहा- 2024 में BJP के 54 हजार वोट कांग्रेस के पक्ष में चले गए
➤ दिग्विजय चौटाला ने चौटाला गांव में चिट्टा-अफीम के कारोबार को लेकर अभय पर पलटवार किया
➤ नशे पर अभय ने SP को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया, कार्रवाई नहीं होने पर विरोध की चेतावनी
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजों को आए समय बीत चुका है, लेकिन सिरसा और ऐलनाबाद के राजनीतिक गलियारों में हार-जीत के कारणों पर मंथन और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमा नहीं है। ऐलनाबाद में कार्यकर्ता बैठकों के दौरान इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला जहां अपनी चुनावी हार की वजह भाजपा और कांग्रेस के कथित गुप्त गठजोड़ को बता रहे हैं, वहीं डबवाली और चौटाला गांव में बढ़ते नशे के कारोबार ने INLD और JJP के बीच एक बार फिर सियासी टकराव को तेज कर दिया है।
चुनाव परिणाम के महीनों बाद भी देवीलाल परिवार की राजनीति में एक-दूसरे पर निशाना साधने का दौर जारी है। एक ओर अभय चौटाला 2024 के चुनावी आंकड़ों को सामने रखकर अपनी हार का राजनीतिक गणित समझा रहे हैं, तो दूसरी ओर नशे के मुद्दे पर उनके रुख को लेकर जजपा महासचिव दिग्विजय चौटाला ने सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार किया है। इससे सिरसा की राजनीति में चाचा-भतीजे के बीच पुरानी सियासी खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
ऐलनाबाद की हार पर अभय चौटाला ने सामने रखी अपनी थ्योरी
ऐलनाबाद हलके के दौरे पर पहुंचे अभय सिंह चौटाला ने 2024 के चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए अपनी हार की वजहों को लेकर कई दावे किए। उन्होंने उपचुनाव और विधानसभा चुनाव के वोट आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि किसान आंदोलन के दौर में हुए उपचुनाव में उन्हें 64 हजार वोट मिले थे, जबकि 2024 के आम चुनाव में उनका वोट बढ़कर 68 हजार हो गया।
अभय चौटाला के मुताबिक, उपचुनाव में भाजपा को मिले 54 हजार वोटों का बड़ा हिस्सा इस बार भाजपा प्रत्याशी के बजाय सीधे कांग्रेस के पाले में चला गया। उनका दावा है कि इसी तरह के क्रॉस-वोटिंग के कारण चुनावी समीकरण बदल गए।
इनेलो प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी दलों ने जानबूझकर ऐसा उम्मीदवार मैदान में उतारा, जिससे वोटों का डायवर्जन हो सके। उन्होंने चुनावी रणनीति और प्रत्याशी चयन को भी अपनी हार के समीकरण से जोड़कर देखा।
भूपेंद्र हुड्डा पर भी लगाए गंभीर आरोप
अभय चौटाला ने कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा पर भी निशाना साधा। उन्होंने अपने पुराने आरोप को दोहराते हुए कहा कि चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों की ओर से ED कार्रवाई के दबाव में कांग्रेस नेतृत्व ने ऐसी रणनीति अपनाई, जो भाजपा के अनुकूल रही।
अभय के इस दावे के मुताबिक, इस राजनीतिक रणनीति का खामियाजा क्षेत्रीय दलों को भुगतना पड़ा। हालांकि, यह उनके द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
अब नशे के मुद्दे पर आमने-सामने INLD और JJP
चुनावी हार की समीक्षा के साथ ही ऐलनाबाद और डबवाली क्षेत्र में बढ़ते नशे के कारोबार का मुद्दा भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अभय चौटाला ने इलाके में चिट्टा और अफीम के कथित अवैध कारोबार को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
अभय सिंह ने दावा किया कि चौटाला गांव की गलियों तक में नशा बिक रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर सिरसा के पुलिस अधीक्षक यानी SP से वार्ता करने की बात कही और प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया।
उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर नशे के सौदागरों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, तो इनेलो पुलिस प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी। इस चेतावनी के बाद नशे का मुद्दा सीधे राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन गया है।
दिग्विजय चौटाला ने सोशल मीडिया पर किया पलटवार
अभय चौटाला के इस रुख पर जजपा महासचिव दिग्विजय चौटाला ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया। उन्होंने डबवाली और चौटाला गांव में चिट्टा-अफीम के कथित कारोबार को लेकर अभय पर ही सवाल खड़े किए।
दिग्विजय ने लिखा कि डबवाली और चौटाला गांव में चिट्टा-अफीम कौन बिकवाता है और किसे पुलिस का संरक्षण हासिल है, यह पूरा इलाका जानता है। उन्होंने अभय पर तंज कसते हुए कहा कि जिनके खुद के घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों पर सवाल नहीं उठाने चाहिए।
दिग्विजय के इस पलटवार ने नशे के मुद्दे को राजनीतिक बहस के और केंद्र में ला दिया है। अब दोनों पक्ष एक-दूसरे से जवाबदेही मांगते नजर आ रहे हैं।
जनता के सवालों के घेरे में स्थानीय राजनीति
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक चर्चाओं में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि चौटाला गांव जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र में नशे का कारोबार खुलेआम होने के दावे किए जा रहे हैं, तो अब तक सत्ता या विपक्ष में रहे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका क्या रही।
नशे के मुद्दे पर सामने आए आरोपों ने राजनीतिक दलों के सामने जवाबदेही का सवाल भी खड़ा किया है। जनता के बीच यह चर्चा भी है कि किसी क्षेत्र में लंबे समय से नशे की समस्या होने के दावों के बावजूद इस पर निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई।
पारंपरिक वोट बैंक बचाने की चुनौती
2024 के विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद इनेलो और जजपा दोनों के सामने अपने पारंपरिक ग्रामीण और किसान वोट बैंक को संभाले रखने की चुनौती है। सिरसा और डबवाली क्षेत्र में दोनों दलों की राजनीति का आधार लंबे समय से ग्रामीण इलाकों और चौटाला परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ा रहा है।
ऐसे में चुनाव खत्म होने के बाद भी स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नशे जैसा मुद्दा अब केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में राजनीतिक अस्तित्व और प्रभाव की लड़ाई का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।
देवीलाल कुनबे में वर्चस्व की लड़ाई अब भी जारी
सिरसा-डबवाली पट्टी में चुनावी नतीजों के महीनों बाद भी जारी यह जुबानी जंग बताती है कि देवीलाल परिवार के राजनीतिक कुनबे में वर्चस्व की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। चुनावी हार की समीक्षा से शुरू हुई बहस अब नशे जैसे स्थानीय और गंभीर मुद्दे तक पहुंच चुकी है।
अब सवाल यह है कि नशे के मुद्दे पर पुलिस प्रशासन को दिया गया एक सप्ताह का अल्टीमेटम किसी ठोस कार्रवाई में बदलता है या फिर यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और दोनों दलों की राजनीतिक रणनीति यह तय करेगी कि सिरसा की इस सियासी जंग का अगला केंद्र क्या बनता है।
Akhil Mahajan