जन्मदिन पर ड्यूटी के दौरान CRPF सब इंस्पेक्टर की मौत, दिल्ली में आया हार्ट अटैक; करनाल में राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार

करनाल के जुंडला निवासी CRPF सब इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार की दिल्ली में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हुई। जन्मदिन पर निधन के बाद राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार हुआ।

जन्मदिन पर ड्यूटी के दौरान CRPF सब इंस्पेक्टर की मौत, दिल्ली में आया हार्ट अटैक; करनाल में राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार

डिप्टी CM प्रवेश शर्मा के दिल्ली स्थित आवास पर ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत

56 वर्षीय कृष्ण कुमार की मौत उसी दिन हुई, जिस दिन उनका जन्मदिन था

CRPF के साथ NSG में 6 और RAF में 2 साल दी सेवा, जुंडला में राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार


हरियाणा के करनाल निवासी CRPF सब इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार (56) का ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से निधन हो गया। कृष्ण कुमार दिल्ली के डिप्टी सीएम प्रवेश शर्मा के आवास पर ड्यूटी दे रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। रविवार को उनका पार्थिव शरीर करनाल के जुंडला गांव लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

कृष्ण कुमार के निधन की सबसे भावुक बात यह रही कि जिस दिन उन्होंने अंतिम सांस ली, उसी दिन उनका जन्मदिन भी था। वह CRPF की 27वीं बटालियन में तैनात थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी हैं। उनका बेटा कनाडा में रहता है। पिता के निधन की खबर मिलते ही वह तुरंत जुंडला गांव पहुंचा।

जुंडला गांव में कृष्ण कुमार का पार्थिव शरीर पहुंचने पर पूरे गांव में शोक का माहौल रहा। CRPF के जवान उनके पार्थिव शरीर को गांव लेकर पहुंचे और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

ड्यूटी के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

परिवार के सदस्य सुभाष ने बताया कि 7 अगस्त, शुक्रवार को कृष्ण कुमार ड्यूटी पर थे। सुबह करीब 11 बजे अचानक उनका ब्लड प्रेशर लो हो गया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।

मौके पर मौजूद CRPF के जवानों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया। वहां उनका इलाज शुरू किया गया। रात में उनकी हालत और बिगड़ गई। कुछ देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

परिवार के लिए यह खबर इसलिए भी बेहद झकझोर देने वाली थी, क्योंकि कृष्ण कुमार पूरी तरह ड्यूटी पर थे और उसी दिन उनका जन्मदिन भी था। परिवार को उम्मीद थी कि वह जन्मदिन के मौके पर घर लौटेंगे, लेकिन रात में उनके निधन की खबर पहुंची।

रात डेढ़ बजे परिवार को मिली मौत की खबर

सुभाष के मुताबिक, परिवार को रात करीब डेढ़ बजे फोन आया। फोन पर बताया गया कि कृष्ण कुमार की हृदय गति रुकने से मौत हो गई है।

एक तरफ परिवार के लिए उनके जन्मदिन का दिन था और दूसरी तरफ उसी दिन उनके निधन की खबर ने घर में मातम पसरा दिया। बेटे को जैसे ही पिता के निधन की जानकारी मिली, वह कनाडा से तुरंत जुंडला गांव पहुंचा।

रविवार को CRPF के जवान कृष्ण कुमार का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे। इसके बाद जुंडला गांव के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

CRPF ही नहीं, NSG और RAF में भी दी सेवा

कृष्ण कुमार का पूरा सेवाकाल देश सेवा से जुड़ा रहा। परिवार के सदस्य सुभाष के मुताबिक, उन्होंने CRPF के अलावा नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) में 6 साल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) में 2 साल तक सेवाएं दीं।

उनका परिवार भी सैन्य और सुरक्षा सेवाओं से जुड़ा रहा है। कृष्ण कुमार सात भाई थे और वह मंझले भाई थे। उनके बड़े भाई वायु सेना से रिटायर्ड हैं। वहीं उनके चाचा भी सेना में रह चुके हैं।

इस तरह कृष्ण कुमार के परिवार में देश सेवा की परंपरा रही है। उन्होंने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सुरक्षा बलों में सेवा करते हुए बिताया।

रिटायरमेंट के लिए कहते थे परिवार वाले, लेकिन नहीं माने

सुभाष के मुताबिक, परिवार के लोग कई बार कृष्ण कुमार से रिटायरमेंट लेने के लिए कहते थे। उम्र बढ़ने के साथ परिवार चाहता था कि वह अब नौकरी से आराम लेकर घर के साथ समय बिताएं।

लेकिन कृष्ण कुमार का जवाब हमेशा अलग होता था। वह कहते थे कि वह जीवनभर देश की सेवा करना चाहते हैं। परिवार के मुताबिक, देश सेवा को लेकर उनका यही जज्बा उनके लिए गर्व की बात था।

कृष्ण कुमार की अचानक मौत से परिवार के साथ-साथ जुंडला गांव में भी शोक का माहौल है। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन के वर्षों देश की सुरक्षा और सेवा में लगाए, उसकी विदाई भी पूरे सम्मान के साथ हुई।

जन्मदिन पर मिली अंतिम विदाई

कृष्ण कुमार की कहानी का सबसे भावुक पहलू यही रहा कि जन्मदिन के दिन ही उनका निधन हो गया। ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने से शुरू हुई परेशानी ने कुछ ही घंटों में परिवार को ऐसी खबर दे दी, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

रविवार को जब उनका पार्थिव शरीर जुंडला गांव पहुंचा तो CRPF के जवान भी साथ थे। राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में उनकी देश सेवा को सम्मान दिया गया। परिवार के लिए यह सिर्फ एक अपूरणीय क्षति नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की विदाई थी जिसने रिटायरमेंट के बजाय आखिरी समय तक देश सेवा को प्राथमिकता दी।