भिवानी में मनीषा के पिता को पुलिस ने अनशन से रोका, सड़क पर महिलाओं का हंगामा
भिवानी में लेडी टीचर मनीषा मौत मामले में आमरण अनशन पर जा रहे पिता को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। CBI जांच में देरी को लेकर ग्रामीणों और महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
➤ डीसी ऑफिस में आमरण अनशन के लिए जा रहे मनीषा के पिता को पुलिस ने कुड़ल गांव के पास रोका
➤ पुलिस कार्रवाई के विरोध में ग्रामीण और महिलाएं सड़क पर धरने पर बैठीं
➤ 10 महीने बाद भी CBI जांच पूरी नहीं होने पर परिवार ने उठाए सवाल
➤ विस्तृत खबर
भिवानी। हरियाणा के भिवानी में चर्चित लेडी टीचर मनीषा मौत मामले को लेकर सोमवार को फिर माहौल गरमा गया। मनीषा के पिता संजय कुमार अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से ग्रामीणों के साथ डीसी कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठने के लिए रवाना हुए थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें कुड़ल गांव के पास ही रोक दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने वहीं धरना शुरू कर दिया और मौके पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।
पुलिस अधिकारियों ने संजय कुमार को बताया कि आमरण अनशन की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बाद उनके साथ मौजूद ग्रामीणों और महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। कई महिलाएं सड़क पर बैठकर रोने लगीं, जबकि अन्य ग्रामीण भी मौके पर धरने पर बैठ गए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कुड़ल गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया।
दूसरी ओर भिवानी लघु सचिवालय में पहले से मौजूद कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया और उनके समर्थकों को भी पुलिस ने वहां से हटा दिया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। एहतियात के तौर पर सचिवालय परिसर में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
मनीषा के पिता संजय कुमार का कहना है कि उनकी बेटी की मौत को 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन CBI अब तक यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने कहा कि परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि मनीषा 11 अगस्त 2025 को अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से ड्यूटी के लिए निकली थीं। इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटीं। 13 अगस्त 2025 को उनका शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला था। परिवार ने हत्या का आरोप लगाया था, जबकि शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था। बाद में विरोध बढ़ने पर मामले की जांच 26 अगस्त 2025 को CBI को सौंप दी गई थी।
➤ आमरण अनशन के लिए जा रहे मनीषा के पिता को पुलिस ने रास्ते में रोका
➤ कुड़ल गांव के पास महिलाओं और ग्रामीणों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
➤ 10 महीने बाद भी CBI जांच पूरी न होने पर परिवार ने उठाए सवाल
भिवानी। हरियाणा के भिवानी में चर्चित लेडी टीचर मनीषा मौत मामले को लेकर सोमवार को एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। मनीषा के पिता संजय अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से डीसी कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठने के लिए रवाना हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें कुड़ल गांव के पास ही रोक दिया। इसके बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने परिवार को बताया कि आमरण अनशन की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कई महिलाएं सड़क पर बैठकर रोने लगीं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए कुड़ल गांव और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
इधर, भिवानी लघु सचिवालय पहुंचे कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया और उनके समर्थकों को भी पुलिस ने परिसर से हटा दिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। प्रशासन ने सचिवालय परिसर में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।
मनीषा के पिता संजय का कहना है कि उनकी बेटी की मौत को करीब 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन CBI अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने कहा कि जांच में लगातार हो रही देरी से परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया ने आरोप लगाया कि मनीषा को न्याय दिलाने के लिए लंबे समय से धरना-प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली महापंचायत में निर्णय लिया गया था कि 29 जून को मनीषा के पिता डीसी कार्यालय के बाहर आमरण अनशन शुरू करेंगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं दे रही और ऐसा प्रतीत होता है कि किसी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि मनीषा 11 अगस्त 2025 को अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से प्ले स्कूल में ड्यूटी के लिए निकली थीं। इसके बाद उन्होंने नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश से संबंधित कार्य के लिए जाने की बात कही थी, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटीं। 13 अगस्त 2025 को उनका शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला था। परिवार ने इसे हत्या बताया था, जबकि शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था।
बढ़ते जनआक्रोश और लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद मनीषा का तीसरी बार पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स में कराया गया। इसके बाद 26 अगस्त 2025 को मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। अब भी जांच पूरी नहीं होने के कारण परिवार और समर्थकों में नाराजगी बनी हुई है।
Akhil Mahajan