भिवानी में परंपरा की मिसाल — पीले चावलों की पोटली से शादी का निमंत्रण

हरियाणा के भिवानी निवासी पवन मस्ता ने अपने बेटे की शादी का निमंत्रण देने का अनोखा और पारंपरिक तरीका अपनाया है। उन्होंने आधुनिक कार्डों की जगह पीले चावलों की पोटली में निमंत्रण दिया। भारतीय संस्कृति के अनुसार यह परंपरा सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

भिवानी में परंपरा की मिसाल — पीले चावलों की पोटली से शादी का निमंत्रण

भिवानी में अनूठी पहल — पीले चावलों की पोटली से दी जा रही है शादी का निमंत्रण
आधुनिक चमक-दमक के बीच भारतीय परंपरा का पुनर्जीवन
पवन मस्ता ने बेटे की शादी में अपनाई कम खर्चीली और सांस्कृतिक परंपरा

भिवानी। आज के दौर में जब शादियां दिखावे और खर्च की होड़ में बदल चुकी हैं, वहीं हरियाणा के भिवानी निवासी पवन मस्ता ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जो समाज को परंपराओं की ओर लौटने का संदेश देती है। आधुनिक शादी कार्डों और डिजिटल निमंत्रणों के दौर में पवन मस्ता ने अपने बेटे की शादी का निमंत्रण पीले चावलों की पोटली में देकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

पवन मस्ता ने बताया कि भारतीय संस्कृति में पीले चावल सौभाग्य, पवित्रता और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। पुराने समय में जब किसी घर में शादी होती थी, तो लोग मेल (प्रतिभोज) के निमंत्रण के लिए पीले चावल और बारात के लिए सुपारी देकर अतिथियों को आमंत्रित करते थे। उन्होंने उसी परंपरा को आधुनिकता के बीच जीवित रखने की पहल की है।

अपने बेटे आकाश मस्ता, जो म्यूनिसिपल कमेटी सदस्य हैं, की शादी अंबाला निवासी शिक्षिका ज्योति से 2 नवंबर को होनी है। इसके लिए 30 अक्टूबर को होने वाले मेल कार्यक्रम का निमंत्रण पवन मस्ता ने अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों को पीले चावलों की छोटी पोटली में बांधकर दिया है।

इस पोटली पर ही वर-वधु के नाम, शादी की तारीख, समय और स्थल का पूरा विवरण अंकित किया गया है। इससे न केवल निमंत्रण पत्र का खर्च बचा बल्कि एक सांस्कृतिक और भावनात्मक संदेश भी समाज तक पहुंचा।

पवन मस्ता का कहना है कि “हमारी संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी हैं, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हम इन्हें भूलते जा रहे हैं। मैंने यह कदम इसलिए उठाया ताकि अगली पीढ़ी भी समझ सके कि संस्कार, सादगी और परंपरा में ही असली आनंद है।

स्थानीय लोगों ने भी पवन मस्ता की इस पहल की सराहना की है। कई लोगों का कहना है कि यह तरीका न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि सामाजिक समानता और भारतीय परंपरा का सम्मान भी दर्शाता है।