हिमाचल सरकार की नई तबादला नीति, कठिन क्षेत्रों में 3 साल की सेवा अनिवार्य

हिमाचल सरकार ने कर्मचारियों की तबादला नीति में संशोधन किया है। अब कठिन और जनजातीय क्षेत्रों में तीन साल की सेवा अनिवार्य होगी। 55 वर्ष से अधिक कर्मचारियों को भी आंशिक राहत मिलेगी।

हिमाचल सरकार की नई तबादला नीति, कठिन क्षेत्रों में 3 साल की सेवा अनिवार्य
  • हिमाचल सरकार ने तबादला नीति में बड़ा संशोधन किया
  • कठिन और जनजातीय क्षेत्रों में अब तीन साल की सेवा अनिवार्य होगी
  • 55 वर्ष से अधिक कर्मचारियों को यथासंभव ऐसे क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जाएगा

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों की तबादला नीति में बड़ा संशोधन करते हुए कॉम्प्रिहेंसिव गाइडिंग प्रिंसिपल्स-2013 (CGP-2013) के प्रावधानों में बदलाव किया है। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में 25 जुलाई 2026 को कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी कर नई व्यवस्था लागू कर दी है।

सरकार ने कहा है कि कठिन (Difficult), जनजातीय (Tribal), हार्ड (Hard) और अति कठिन (Most Difficult) क्षेत्रों में तैनाती से जुड़े नियमों के क्रियान्वयन में कई तरह की अस्पष्टताएं सामने आ रही थीं। इन्हें दूर करने और सभी विभागों में एक समान व्यवस्था लागू करने के लिए CGP-2013 के पैरा 16.1 में संशोधन किया गया है।

संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब कठिन, जनजातीय, हार्ड और अति कठिन क्षेत्रों में कर्मचारियों का सामान्य कार्यकाल तीन वर्ष होगा। इस अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को दो सर्दियां और तीन गर्मियां वास्तविक रूप से वहां सेवा देनी होगी। तभी उसका कार्यकाल पूर्ण माना जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी इस दौरान लंबे अवकाश पर रहता है, तो उसकी अनुपस्थिति की अवधि को सेवा अवधि में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को अवकाश के बराबर अतिरिक्त समय उसी क्षेत्र में कार्य करना होगा।

नई नीति में 55 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि यथासंभव इस आयु वर्ग के कर्मचारियों की तैनाती कठिन, जनजातीय, हार्ड या दूरस्थ क्षेत्रों में न की जाए। हालांकि यह प्रावधान पदोन्नति (Promotion) के मामलों में लागू नहीं होगा।

कार्मिक विभाग ने अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी केवल अतिरिक्त प्रभार के आधार पर किसी कठिन या जनजातीय क्षेत्र का कार्यभार संभालता है और वहां नियमित रूप से नियुक्त नहीं है, तो उस अवधि को उस क्षेत्र में की गई सेवा नहीं माना जाएगा।

सरकार ने कहा है कि अतिरिक्त प्रभार की अवधि को न तो निर्धारित कार्यकाल में जोड़ा जाएगा और न ही किसी लाभ, रियायत, वरीयता या प्रोत्साहन के लिए पात्रता तय करने में शामिल किया जाएगा।

कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव (कार्मिक) नीरज कुमार द्वारा जारी आदेश में सभी विभागों को संशोधित प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।