जीते जी मां का ब्रह्मभोज, 9 लाख खर्च कर परिवार ने किया सम्मान
फतेहाबाद में 80 वर्षीय खजानी देवी के जीवित रहते परिवार ने 9 लाख रुपये खर्च कर ब्रह्मभोज आयोजित किया। हर मेहमान को 3 किलो लड्डू दिए गए और सम्मान का अनोखा संदेश दिया।
- फतेहाबाद में 80 वर्षीय मां के जीवित रहते परिवार ने कराया ब्रह्मभोज
- करीब 9 लाख रुपये खर्च, डीजे पर नाचा परिवार और हर मेहमान को दिए 3 किलो लड्डू
- हरियाणा और राजस्थान से पहुंचे रिश्तेदार, परिवार बोला- सम्मान जीते जी मिलना चाहिए
फतेहाबाद। हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक परिवार ने ब्रह्मभोज की परंपरा को नया स्वरूप देते हुए अपनी 80 वर्षीय मां खजानी देवी के जीवित रहते ही उनका ब्रह्मभोज आयोजित किया। इस अनोखे आयोजन में सैकड़ों मेहमान शामिल हुए। मेहमानों के लिए जलेबी और विभिन्न व्यंजनों का भोज रखा गया, जबकि विदाई के समय प्रत्येक अतिथि को 3 किलो लड्डू भेंट किए गए।
परिवार ने इस आयोजन पर करीब 9 लाख रुपये खर्च किए। परिवार के सदस्यों का कहना है कि किसी व्यक्ति का सम्मान तब सबसे अधिक मायने रखता है, जब वह स्वयं उसे अपनी आंखों से देख और महसूस कर सके। इसी सोच के साथ उन्होंने यह आयोजन किया।
रविवार रात आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक भोज के साथ उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। डीजे की धुन पर परिवार के सदस्यों ने जमकर नृत्य किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
यह आयोजन भट्टू कलां निवासी खजानी देवी के परिवार की ओर से किया गया। खजानी देवी के कुल आठ बेटे-बेटियां हैं। उनके पति मोडूराम का करीब 20 वर्ष पहले निधन हो चुका है। बेटों में सुंदर, हनुमान, गुलाब, छोटूराम और सुभाष शामिल हैं, जबकि बेटियां धर्मा देवी, लाली देवी और भानी देवी हैं। परिवार के अनुसार बेटी लाली देवी और छोटे बेटे सुभाष का निधन हो चुका है।
परिवार कई पीढ़ियों से लोहे के औजार बनाने के पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। आज भी परिवार के सदस्य भट्टू में रहकर इसी काम को आगे बढ़ा रहे हैं।
ब्रह्मभोज में फतेहाबाद के भट्टू, रतिया, पारता, सिरसा जिले के बाजेकां, हिसार तथा राजस्थान के नोहर, मुंसरी और मिराण सहित कई स्थानों से रिश्तेदार पहुंचे। परिवार का कहना है कि माता-पिता का सम्मान केवल उनके निधन के बाद नहीं, बल्कि उनके जीवित रहते किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि अपने सम्मान और परिवार का प्रेम अपनी आंखों से देख पाना किसी भी बुजुर्ग के लिए सबसे बड़ा सुख होता है।
परिवार के सदस्य छोटूराम ने बताया कि उनकी मां खजानी देवी इस उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपना दैनिक काम स्वयं करती हैं। वह पानी की टोकनी भरकर भी ले आती हैं। उनके परिवार में 13 पोते-पोतियां और 11 दोहते-दोहतियां हैं। गांव में यह अनोखा आयोजन पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा।
pooja