हरियाणा में कर्मचारियों-पेंशनरों को बड़ी राहत, मेडिकल प्रतिपूर्ति के लिए आश्रितों की आय सीमा 3500 से बढ़ाकर 9000 रुपये
हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के आश्रितों के लिए मेडिकल प्रतिपूर्ति की मासिक आय सीमा 3,500 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दी है।
➤ आश्रितों की मासिक आय सीमा 3,500 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये की गई
➤ वित्त विभाग की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए संशोधित आदेश
➤ नई आय सीमा से अधिक कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को मिलेगा लाभ
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए मेडिकल प्रतिपूर्ति के लिए आश्रितों की मासिक आय सीमा में ढाई गुना से अधिक की बढ़ोतरी कर दी है। अब ऐसे आश्रित, जिनकी मासिक आय 9,000 रुपये तक है, चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा के लिए आश्रित माने जाएंगे। इससे पहले यह सीमा केवल 3,500 रुपये प्रतिमाह थी। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों के लिए मेडिकल रीइम्बर्समेंट का रास्ता खुल गया है, जो पुरानी और कम आय सीमा के कारण इस सुविधा के दायरे से बाहर हो जाते थे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सोमवार को इस संबंध में संशोधित आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में वर्ष 2007 में निर्धारित आय सीमा में बदलाव किया गया है। करीब दो दशक बाद किए गए इस संशोधन को बढ़ती महंगाई, परिवारों के बढ़ते आर्थिक खर्च और वर्तमान आय परिस्थितियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब दो दशक पुरानी आय सीमा में सरकार ने किया बड़ा बदलाव
हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के आश्रितों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ देने के लिए वर्ष 2007 में 3,500 रुपये मासिक आय सीमा निर्धारित की गई थी। लंबे समय से इसी सीमा के आधार पर यह तय किया जा रहा था कि कोई पारिवारिक सदस्य कर्मचारी या पेंशनर पर आश्रित माना जाएगा या नहीं।
समय के साथ महंगाई और जीवनयापन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई, लेकिन आश्रितों की आय सीमा में उसी अनुपात में बदलाव नहीं होने के कारण कई परिवार इस सुविधा के दायरे से बाहर हो रहे थे। किसी आश्रित की मामूली आय भी यदि 3,500 रुपये प्रतिमाह से अधिक होती थी तो वह चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए निर्धारित आश्रित की श्रेणी से बाहर हो सकता था।
अब सरकार ने इस पुराने प्रावधान में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए सीमा को 9,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद 9,000 रुपये तक मासिक आय वाले पात्र आश्रितों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के उद्देश्य से आश्रित माना जा सकेगा।
3,500 रुपये की सीमा के कारण कई परिवार रह जाते थे सुविधा से बाहर
पुरानी व्यवस्था में आय सीमा कम होने के कारण बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। विशेष रूप से ऐसे आश्रित, जिनकी अपनी आय बेहद सीमित थी लेकिन वह 3,500 रुपये की निर्धारित सीमा से थोड़ी अधिक थी, वे भी सरकारी चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा के लिए पात्र नहीं माने जाते थे।
अब 9,000 रुपये की नई आय सीमा लागू होने से पात्रता का दायरा काफी बढ़ जाएगा। इसका सीधा लाभ उन सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है, जिनके परिवार के आश्रित सदस्य पुरानी आय सीमा के कारण मेडिकल रीइम्बर्समेंट सुविधा से वंचित थे।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब चिकित्सा उपचार और दवाओं पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आश्रितों की आय सीमा बढ़ने से कई परिवारों पर पड़ने वाले स्वास्थ्य खर्च के आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।
वित्त विभाग ने 26 जून को दी थी प्रस्ताव को मंजूरी
स्वास्थ्य विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आय सीमा में संशोधन का फैसला वित्त विभाग की सहमति के बाद लिया गया है। वित्त विभाग ने 26 जून 2026 को इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान की थी। इसके बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से संशोधित आदेश जारी किए गए।
इस प्रशासनिक प्रक्रिया के पूरा होने के साथ अब नई आय सीमा को संबंधित विभागों और कार्यालयों तक पहुंचाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को नए आदेश के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सभी विभागाध्यक्षों और जिला अधिकारियों को भेजी गई आदेश की प्रतियां
संशोधित आदेश की प्रतियां राज्य के सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को भेजी गई हैं। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, महालेखाकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी आदेश की जानकारी देते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
इससे सरकारी विभागों और संबंधित कार्यालयों में मेडिकल प्रतिपूर्ति से जुड़े मामलों का निपटारा नई आय सीमा के अनुसार किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। कर्मचारियों और पेंशनरों के आश्रितों की पात्रता तय करते समय अब संशोधित 9,000 रुपये मासिक आय सीमा को आधार बनाया जाएगा।
नई व्यवस्था से ज्यादा परिवार आएंगे मेडिकल प्रतिपूर्ति के दायरे में
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों और पेंशनरों पर पड़ेगा, जिनके आश्रितों की मासिक आय पहले 3,500 रुपये से अधिक होने के कारण उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजना का लाभ नहीं मिल पाता था। नई सीमा के बाद ऐसे अधिक परिवार सरकारी चिकित्सा सुविधाओं के दायरे में आ सकेंगे।
करीब 19 साल पुरानी आय सीमा में किए गए इस बदलाव को कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है। 3,500 रुपये से सीधे 9,000 रुपये तक की बढ़ोतरी से आश्रित की पात्रता का दायरा व्यापक हुआ है और अब सीमित आय वाले अधिक पारिवारिक सदस्यों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है।
Akhil Mahajan