हिमाचल: कंगना रनौत पहुंचीं बिजली महादेव,कठिन पैदल चढ़ाई कर किए महादेव के दर्शन

सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने कुल्लू के प्रसिद्ध श्री बिजली महादेव मंदिर में पैदल चढ़ाई कर भगवान शिव के दर्शन किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर अपनी आध्यात्मिक अनुभूति भी बताई।

हिमाचल: कंगना रनौत पहुंचीं बिजली महादेव,कठिन पैदल चढ़ाई कर किए महादेव के दर्शन

सांसद कंगना रनौत ने कुल्लू के श्री बिजली महादेव मंदिर में किए दर्शन

कठिन पैदल चढ़ाई पूरी कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और ध्यान किया

सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर बताया- महादेव के दर्शन से मिली अपार शांति


मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध श्री बिजली महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर तक पहुंचने के लिए कठिन पैदल चढ़ाई पूरी की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के साथ मंदिर परिसर में ध्यान भी लगाया।

इस धार्मिक यात्रा के दौरान कंगना रनौत के साथ उनके परिवार के सदस्य और सुरक्षा कर्मी भी मौजूद रहे। देवदार के घने जंगलों और कुल्लू घाटी की खूबसूरत वादियों के बीच उन्होंने पैदल यात्रा का आनंद लिया और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से महसूस किया।

दर्शन के बाद कंगना ने अपनी यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। उन्होंने लिखा कि कठिन चढ़ाई के बाद महादेव के दर्शन कर उन्हें अपार शांति और असीम आनंद की अनुभूति हुई। उनके इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर लोगों की ओर से खूब पसंद किया जा रहा है।

यात्रा के दौरान कंगना पारंपरिक हिमाचली टोपी और सादगीपूर्ण परिधान में नजर आईं। उनकी यह यात्रा हिमाचली संस्कृति, धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को भी दर्शाती है। उन्होंने स्थानीय वातावरण का आनंद लेने के साथ पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों का स्वाद भी चखा।

श्री बिजली महादेव मंदिर समुद्र तल से करीब 8,100 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और कुल्लू घाटी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चांसारी गांव से लगभग 3 से 4 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसे पूरा करने में सामान्यतः डेढ़ से तीन घंटे का समय लगता है।

यह मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि लगभग हर 12 वर्ष में मंदिर के शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है, जिससे वह खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को मक्खन और सत्तू के लेप से जोड़ते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि कुछ समय बाद शिवलिंग फिर अपने मूल स्वरूप में दिखाई देने लगता है। यही परंपरा बिजली महादेव मंदिर को देश के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में शामिल करती है।