अयोध्या राम मंदिर दान में कथित चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, UP SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट; ट्रस्ट को नोटिस

अयोध्या राम मंदिर दान में कथित चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने UP SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया।

अयोध्या राम मंदिर दान में कथित चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, UP SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट; ट्रस्ट को नोटिस

अयोध्या राम मंदिर दान में कथित चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, UP SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट; ट्रस्ट को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की SIT से अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

अदालत ने रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और अहम सबूत सुरक्षित रखने पर दिया जोर

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित चोरी तथा गबन के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। सोमवार, 13 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) से जांच की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया है। याचिकाओं में मामले की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के बाद अब इस संवेदनशील मामले की जांच और उससे जुड़े घटनाक्रम पर देशभर की नजरें टिक गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सामने दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मंदिर को श्रद्धालुओं से मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा जांच की स्वतंत्रता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते हुए न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की है। फिलहाल ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष अदालत या सक्षम जांच एजेंसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

SIT को बताना होगा जांच कहां तक पहुंची, ट्रस्ट समेत संबंधित पक्षों से भी जवाब तलब

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की SIT को अब तक हुई जांच की स्थिति से अदालत को अवगत कराने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही मंदिर के संचालन और प्रबंधन से जुड़े श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से भी जवाब मांगा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होने की रिपोर्ट है। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई है कि जांच में देरी होने पर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का मुद्दा भी अदालत के सामने उठाया गया है।

अदालत की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग, मौजूदा SIT पर उठाए गए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जांच के लिए एक निश्चित समयसीमा होनी चाहिए और प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे उसकी निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।

याचिकाओं में अदालत की निगरानी में जांच की मांग के साथ यह चिंता भी जताई गई है कि महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और दूसरे साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जरूरी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मामले की प्रकृति को देखते हुए जांच में पारदर्शिता और साक्ष्यों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही गठित कर चुकी है SIT, जांच के बाद तेज हुई कार्रवाई

अयोध्या राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, SIT की प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस कार्रवाई तेज हुई और मामले में नामजद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों का संबंध मंदिर में दान और चढ़ावे की रकम की गिनती अथवा उसके प्रबंधन से जुड़े कार्यों से बताया गया है। हालांकि, सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और आरोपियों की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा मामला, ट्रस्ट के भीतर भी हुआ बड़ा घटनाक्रम

इस प्रकरण में कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के पद छोड़ने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों ने इस घटनाक्रम को SIT जांच और आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बढ़े विवाद से जोड़ा था।

इस मामले में विभिन्न व्यक्तियों की भूमिका को लेकर कई दावे और आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका को दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि किसकी क्या जिम्मेदारी बनती है।

दान की रकम और आभूषणों में कथित हेरफेर के आरोप, जांच के केंद्र में सुरक्षा व्यवस्था

मामले में आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताएं हुईं। कुछ रिपोर्टों में दान की रकम और आभूषणों में कथित हेरफेर के साथ सुरक्षा तथा निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियों का भी उल्लेख किया गया है। SIT की जांच में सुरक्षा उपायों और प्रक्रियागत कमियों की पड़ताल किए जाने की खबरें सामने आई हैं।

CCTV कैमरों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जुड़े आरोप भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी कारण याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। इन आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें, SIT की रिपोर्ट होगी अहम

सुप्रीम कोर्ट द्वारा SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगने के बाद जांच की अब तक की प्रगति अदालत के सामने आएगी। इससे यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं, किन पहलुओं की पड़ताल की गई है और आगे जांच किस दिशा में बढ़ रही है।

मामला देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़े दान और श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है। ऐसे में पारदर्शी जांच और तथ्यों का स्पष्ट रूप से सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब अगली सुनवाई और SIT की रिपोर्ट पर निगाहें रहेंगी।