हर महीने 10 तारीख को पेंशन, 70 हजार बुजुर्गों को राहत; रोकी गई रकम बहाल, आय सीमा पर भी मंथन

हरियाणा सरकार ने बुढ़ापा पेंशन की तारीख तय करते हुए हर माह 10 को भुगतान का निर्णय लिया है। नवंबर-दिसंबर में रोकी गई 70 हजार बुजुर्गों की पेंशन बहाल कर दी गई है। आय सीमा बढ़ाने पर भी सियासी चर्चा तेज है।

हर महीने 10 तारीख को पेंशन, 70 हजार बुजुर्गों को राहत; रोकी गई रकम बहाल, आय सीमा पर भी मंथन

हर माह 10 तारीख को पेंशन जारी
70 हजार बुजुर्गों की रोकी पेंशन बहाल
CM की मंजूरी बिना अब नहीं रुकेगा भुगतान


हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए भुगतान की तारीख तय कर दी है। अब प्रदेश में हर महीने की 10 तारीख को पेंशन जारी होगी। इसके साथ ही जिन करीब 70 हजार बुजुर्गों की पेंशन नवंबर और दिसंबर में होल्ड की गई थी, उसे बहाल कर दिया गया है। नवंबर की रोकी गई पेंशन शनिवार को जारी कर दी गई, जबकि दिसंबर की पेंशन अगले दो-तीन दिनों में जारी होने की बात कही गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक किसी लाभार्थी को अपात्र साबित नहीं किया जाता, तब तक उसका भुगतान नहीं रोका जाएगा।

समाज कल्याण विभाग द्वारा नवंबर में पेंशन होल्ड किए जाने के बाद प्रदेशभर में असंतोष फैल गया था। विभाग का तर्क था कि कुछ लाभार्थियों ने उम्र और आय से जुड़ी गलत जानकारी दी है, जबकि कई मामलों में परिवार के अन्य सदस्य भी पेंशन ले रहे थे। इसी आधार पर करीब 70 हजार पेंशनर्स का भुगतान रोक दिया गया। यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक रंग ले गया और विपक्षी दलों ने जिला मुख्यालयों पर धरने-प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। कांग्रेस के साथ-साथ इनेलो और जजपा ने भी इसे बुजुर्गों के सम्मान से जोड़ते हुए सरकार पर हमला बोला।

बढ़ते दबाव के बीच 11 फरवरी को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। इसमें सेवा विभाग और पेंशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर सख्त निर्देश दिए गए कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी बुजुर्ग की पेंशन न रोकी जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि किसी की पात्रता संदिग्ध है तो पहले उसे सूचना दी जाए, दस्तावेज जमा कराने का अवसर दिया जाए और जरूरत पड़े तो अधिकारी स्वयं घर जाकर जांच करें, लेकिन भुगतान जारी रखा जाए। अब बिना मुख्यमंत्री की अनुमति किसी भी बुजुर्ग की पेंशन रोकना संभव नहीं होगा।

इसी दिन सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया। हालांकि बढ़ोतरी की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद इसे औपचारिक रूप दिया गया।

अब सबसे बड़ा सवाल आय सीमा को लेकर है। फिलहाल 60 वर्ष से अधिक आयु के वे बुजुर्ग पेंशन के पात्र हैं जिनकी पारिवारिक आय तीन लाख रुपये वार्षिक से कम है। विपक्ष का तर्क है कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान भत्ता है, इसलिए आय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। सियासी हलकों में चर्चा है कि बजट सत्र में सरकार इस सीमा पर पुनर्विचार कर सकती है।

प्रदेश की राजनीति में बुजुर्गों की पेंशन हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही है। ऐसे में सरकार का यह कदम राहत देने वाला माना जा रहा है, लेकिन आय सीमा और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर आगे क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।