बिजली हड़ताल पर आर-पार: सरकार से लिखित भरोसा मांग रहा साझा मोर्चा, बोला- नेताओं की गिरफ्तारी हुई तो 5 मिनट में हरियाणा ब्लैकआउट
हरियाणा में बिजली हड़ताल के बीच साझा मोर्चा ने निजीकरण और स्मार्ट मीटर रद्द करने का लिखित भरोसा मांगा। नेताओं की गिरफ्तारी पर ब्लैकआउट की चेतावनी दी।
➤ निजीकरण और स्मार्ट मीटर रद्द करने का लिखित आश्वासन मांग रहा साझा मोर्चा
➤ मीटिंग के बहाने नेताओं की गिरफ्तारी हुई तो पांच मिनट में ब्लैकआउट की चेतावनी
➤ मोर्चे ने सीएम नायब सैनी, अनिल विज और आशिमा बराड़ को जिम्मेदार ठहराने की बात कही
चंडीगढ़। हरियाणा में प्रस्तावित बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सरकार और कर्मचारियों के साझा मोर्चे के बीच टकराव और बढ़ता नजर आ रहा है। बिजली कर्मचारियों के साझा मोर्चा ने साफ कर दिया है कि निजीकरण और स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर केवल मौखिक आश्वासन से समझौता नहीं होगा। मोर्चे ने सरकार से मांग की है कि निजीकरण और स्मार्ट मीटर रद्द करने का फैसला लिखित रूप में दिया जाए या इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट घोषणा की जाए।
साझा मोर्चा की ओर से कहा गया है कि जब तक सरकार की तरफ से इन मुद्दों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता या प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट ऐलान नहीं किया जाता, तब तक समझौता नहीं किया जाएगा। बिजली कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों को लेकर स्थिति स्पष्ट किए बिना आंदोलन वापस लेने का सवाल नहीं है।
मीटिंग के बहाने गिरफ्तारी हुई तो ब्लैकआउट की चेतावनी
बिजली कर्मचारियों के साझा मोर्चा ने सरकार को और कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। मोर्चे की ओर से कहा गया है कि यदि सरकार ने उनके नेताओं को मीटिंग के बहाने गिरफ्तार करने की कोशिश की तो पांच मिनट के भीतर पूरे हरियाणा में ब्लैकआउट कर दिया जाएगा।
मोर्चे ने इस स्थिति के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी, बिजली मंत्री अनिल विज और एसीएस आशिमा बराड़ को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
इस चेतावनी के बाद बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहा विवाद और गंभीर हो गया है। एक तरफ कर्मचारी निजीकरण और स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के सामने बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की चुनौती है।
लिखित आदेश या प्रेस कॉन्फ्रेंस की मांग
साझा मोर्चा का कहना है कि निजीकरण और स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार की स्थिति केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मोर्चा चाहता है कि सरकार निजीकरण और स्मार्ट मीटर रद्द करने का स्पष्ट लिखित भरोसा दे।
इसके अलावा मोर्चे ने कहा है कि यदि सरकार लिखित रूप में फैसला नहीं देती तो प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक तौर पर इसकी घोषणा की जाए। मोर्चे के मुताबिक, जब तक इस तरह का स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आंदोलन के बीच बढ़ा टकराव
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर पहले ही सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत का दौर चल चुका है। अब साझा मोर्चा की ओर से जारी इस चेतावनी से साफ है कि विवाद केवल मांगों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास का संकट भी गहराता जा रहा है।
मोर्चे की ओर से नेताओं की संभावित गिरफ्तारी को लेकर दी गई चेतावनी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। कर्मचारियों ने साफ संकेत दिया है कि उनके नेताओं के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को आंदोलन के खिलाफ कदम माना जाएगा और इसका जवाब बिजली आपूर्ति रोककर देने की चेतावनी दी गई है।
फिलहाल बिजली कर्मचारियों की ओर से निजीकरण और स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर लिखित या सार्वजनिक आश्वासन की मांग के साथ आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच अगली बातचीत में क्या रास्ता निकलता है।
Akhil Mahajan