हरियाणा में 1500 करोड़ का वर्क स्लिप घोटाला, आज होगी अहम बैठक

हरियाणा में 1500 करोड़ के वर्क स्लिप घोटाले में 90% से ज्यादा स्लिप फर्जी पाई गई हैं। आज जांच कमेटी की बैठक में रिपोर्ट पर बड़ा फैसला हो सकता है।

हरियाणा में 1500 करोड़ का वर्क स्लिप घोटाला, आज होगी अहम बैठक

1500 करोड़ के वर्क स्लिप घोटाले पर आज अहम बैठक
6 लाख में से सिर्फ 53 हजार स्लिप सही, 90% से ज्यादा फर्जी
जांच कमेटी रिपोर्ट पर मंथन, जिम्मेदारी तय होने के संकेत


हरियाणा के श्रम विभाग में सामने आए करीब 1500 करोड़ रुपए के वर्क स्लिप घोटाले को लेकर आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आज होगी, जिसमें प्रारंभिक रिपोर्ट पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बैठक में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

जांच में सामने आए शुरुआती आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। प्रदेश के 13 जिलों में जांची गई 5,99,758 वर्क स्लिप में से केवल 53,249 ही सही पाई गईं, जबकि 5,46,509 स्लिप फर्जी निकलीं। यानी करीब 90 प्रतिशत से ज्यादा वर्क स्लिप में गड़बड़ी सामने आई है। इसी तरह 2,21,517 पंजीकृत मजदूरों में से महज 14,240 ही वास्तविक पाए गए, जबकि 1,93,756 मजदूर फर्जी निकले। इन आंकड़ों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस बड़े घोटाले का खुलासा श्रम मंत्री अनिल विज के निर्देश पर हुई जांच में हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया। इस कमेटी की अध्यक्षता आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल कर रहे हैं, जबकि इसमें आईएएस राजीव रतन और आईपीएस पंकज नैन को भी शामिल किया गया है। कमेटी को प्रदेश के सभी 22 जिलों में जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।

जांच कमेटी हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रही है। इसमें विभागीय रिकॉर्ड, अधिकारियों की भूमिका और फर्जीवाड़े के तरीके का गहन अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही कमेटी यह भी सुझाव देगी कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को कैसे रोका जा सकता है। बताया गया है कि कमेटी को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। हालांकि बजट सत्र और अन्य व्यस्तताओं के चलते अब तक बैठक नहीं हो सकी थी, लेकिन आज की बैठक को निर्णायक माना जा रहा है।

इस घोटाले का दायरा काफी बड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कई जिलों की संलिप्तता सामने आई है। पहले चरण में 13 जिलों में जांच पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी 9 जिलों से भी रिपोर्ट मांगी गई है। सभी जिलों के डीसी को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला स्तर पर समितियां बनाकर जांच रिपोर्ट तैयार करें।

जांच में यह भी सामने आया है कि कई जगहों पर पूरे गांव के लोगों ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करवा कर वर्क स्लिप बनवाईं, ताकि सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ लिया जा सके। इस खुलासे ने सरकारी सिस्टम में बड़े स्तर पर फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही को उजागर कर दिया है।