अदालत में पेश न होने पर हाई कोर्ट नाराज, HSSC सचिव को जारी किया अवमानना नोटिस
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने HSSC सचिव चिन्मय गर्ग को अदालत में पेश न होने और आदेशों की अवहेलना करने पर अवमानना नोटिस जारी किया है।
➤ HSSC सचिव चिन्मय गर्ग को हाई कोर्ट ने जारी किया अवमानना नोटिस
➤ अदालत में पेश न होने पर जस्टिस संदीप मौदगिल ने जताई सख्त नाराजगी
➤ कोर्ट बोला- आदेशों की जानबूझकर की गई अवहेलना बर्दाश्त नहीं होगी
हरियाणा की सरकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अहम मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के सचिव चिन्मय गर्ग के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सचिव के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने के संकेत देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत के आदेशों को हल्के में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने सचिव से पूछा है कि आदेशों की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
यह मामला हरियाणा की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बाल्यान अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि आयोग की ओर से दाखिल किया गया हलफनामा न्यायालय के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं देता।
राज्य सरकार की ओर से अदालत से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया। इस पर जस्टिस संदीप मौदगिल ने राज्य सरकार को राहत देते हुए नया हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया, लेकिन साथ ही सख्त चेतावनी भी दी।
अदालत ने साफ कहा कि यह “अंतिम अवसर” होगा और इसके बाद किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 तय की है।
सुनवाई के दौरान सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब अदालत ने पाया कि HSSC सचिव चिन्मय गर्ग स्वयं अदालत में मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने इस पर तुरंत राज्य के वकील से जवाब मांगा।
अदालत को बताया गया कि सचिव उस समय एडवोकेट जनरल हरियाणा के कार्यालय में मौजूद थे। यह जानकारी मिलते ही हाई कोर्ट ने तीखी नाराजगी जाहिर की।
कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में सचिव को व्यक्तिगत पेशी से कोई छूट नहीं दी गई थी। इसके बावजूद अदालत में उपस्थित न होना न्यायिक आदेशों की सीधी अनदेखी माना जाएगा।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई अधिकारी अदालत के समक्ष जवाबदेह होता है, तब उसका यह दायित्व बनता है कि वह स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करे। केवल हलफनामा दाखिल कर देने से जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सचिव ने न्यायालय के आदेशों की “जानबूझकर और इरादतन अवहेलना” की है। कोर्ट ने माना कि समय पर स्पष्ट जवाब दाखिल नहीं किया गया और सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहकर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सचिव चिन्मय गर्ग के खिलाफ अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि मामले को अत्यावश्यक श्रेणी में सूचीबद्ध किया जाए।
यह मामला अब हरियाणा की भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
Akhil Mahajan