22 साल पुराने सड़क हादसा मामले में बढ़ा मुआवजा, परिवार को राहत

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 100 प्रतिशत दिव्यांग हुए कारोबारी के परिवार को बड़ी राहत देते हुए मुआवजा 24.86 लाख से बढ़ाकर 87.66 लाख रुपए कर दिया। अदालत ने अतिरिक्त 62.80 लाख रुपए 9% ब्याज सहित देने का आदेश दिया।

22 साल पुराने सड़क हादसा मामले में बढ़ा मुआवजा, परिवार को राहत

➤ 22 साल पुराने सड़क हादसा मामले में हाईकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा

➤ ट्रिब्यूनल के 24.86 लाख की जगह अब मिलेंगे 87.66 लाख रुपए

➤ कोर्ट बोला- सम्मानजनक जीवन का अधिकार छिनने की भी भरपाई जरूरी


चंडीगढ़। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का शिकार हुए एक कारोबारी के परिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने करीब 22 वर्ष पुराने मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाते हुए कुल 87.66 लाख रुपए कर दिया है। अदालत ने पहले दिए गए 24.86 लाख रुपए के अलावा 62.80 लाख रुपए अतिरिक्त मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने श्याम सुंदर गुप्ता के कानूनी वारिसों की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि दुर्घटना ने पीड़ित की केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं छीनी, बल्कि उसकी आजीविका कमाने और सामान्य जीवन जीने की संभावनाएं भी समाप्त कर दी थीं। ऐसे मामलों में पीड़ित और उसके परिवार को न्यायसंगत और पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए।

रिकॉर्ड के अनुसार 26 नवंबर 2003 को हुए सड़क हादसे में कारोबारी श्याम सुंदर गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग घोषित कर दिया गया था।

दुर्घटना के बाद उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि वह अपने दैनिक कार्य भी स्वयं नहीं कर पाते थे और जीवनभर दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर हो गए। इलाज के लिए उन्हें देश के विभिन्न अस्पतालों में लंबे समय तक उपचार कराना पड़ा। लगभग 12 वर्षों तक बिस्तर पर रहने के बाद 26 मार्च 2015 को उनका निधन हो गया।

ट्रिब्यूनल ने कई पहलुओं पर नहीं किया था पर्याप्त विचार

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रिब्यूनल ने मुआवजा तय करते समय कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। अदालत ने आयकर रिटर्न के आधार पर श्याम सुंदर गुप्ता की मासिक आय 10,855 रुपए मानी और भविष्य में आय बढ़ने की संभावनाओं को भी शामिल किया।

इसके बाद 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता को आधार बनाकर आय के नुकसान की पुनर्गणना की गई। अदालत ने माना कि हादसे के बाद पीड़ित पूरी तरह कार्य करने में असमर्थ हो गया था।

दर्द, इलाज और परिचारक खर्च के लिए भी बड़ी राशि

हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि तय करते हुए विभिन्न मदों में अलग-अलग रकम स्वीकृत की। अदालत ने दर्द एवं पीड़ा के लिए 15 लाख रुपए, परिचारक खर्च के लिए 8 लाख रुपए, चिकित्सा खर्च के लिए 35 लाख रुपए से अधिक की राशि मंजूर की।

इसके अलावा विशेष आहार, परिवहन खर्च, जीवन की सुविधाओं से वंचित होने तथा विशेष उपकरणों के लिए भी अलग-अलग मुआवजा प्रदान किया गया। अदालत ने कहा कि दुर्घटना के कारण पीड़ित ने सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन जीने की क्षमता खो दी थी, जिसकी भरपाई केवल चिकित्सा खर्च से नहीं की जा सकती।

कानूनी वारिसों को भी मिलेगा मुआवजा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि घायल व्यक्ति की बाद में मृत्यु हो जाती है, तब भी इलाज, दर्द एवं पीड़ा और अन्य मदों में मिलने वाली मुआवजा राशि पर उसके कानूनी वारिसों का अधिकार बना रहता है। यह राशि मृतक की संपत्ति का हिस्सा मानी जाएगी।

इसी आधार पर अदालत ने बीमा कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि बढ़ी हुई मुआवजा राशि दो महीने के भीतर जमा कराई जाए।