अस्‍पताल में बच्चे की मौत, डेढ़ लाख का बिल,शव देने से इनकार का आरोप

करनाल में 7 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत के बाद निजी अस्पताल पर बकाया बिल के कारण शव नहीं देने का आरोप लगा। परिजनों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

अस्‍पताल में बच्चे की मौत, डेढ़ लाख का बिल,शव देने से इनकार का आरोप

7 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत, निजी अस्पताल पर शव रोकने का आरोप

डेढ़ लाख रुपए के बकाया बिल को लेकर परिजनों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

फैक्ट्री हादसे में घायल हुआ था बच्चा, इलाज में परिवार के लाखों रुपए खर्च होने का दावा


करनाल में एक 7 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत के बाद निजी अस्पताल और परिजनों के बीच विवाद सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन करीब डेढ़ लाख रुपए के बकाया बिल का भुगतान होने तक बच्चे का शव देने से इनकार कर रहा है। घटना के बाद परिवार ने जिला प्रशासन, फैक्ट्री मालिक और अस्पताल प्रबंधन से मदद की अपील की है।

मृतक बच्चे के पिता रघुनाथ, जो पानीपत की एक फैक्ट्री में काम करते हैं, ने बताया कि शुक्रवार को उनका बेटा सिद्धार्थ फैक्ट्री गेट के पास खड़ा था। इसी दौरान अचानक उसके ऊपर लोहे का एंगल गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के तुरंत बाद उसे पानीपत के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे करनाल रेफर कर दिया गया।

परिजनों के अनुसार बच्चे को बचाने के लिए विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराया गया। इस दौरान इलाज पर करीब ढाई से तीन लाख रुपए तक खर्च हो गए। बाद में उसे करनाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार का कहना है कि फैक्ट्री मालिक ने शुरुआत में इलाज में आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में सहायता नहीं की।

परिजनों का कहना है कि शनिवार सुबह करीब 9 बजे इलाज के दौरान सिद्धार्थ की मौत हो गई। अस्पताल का कुल बिल करीब डेढ़ लाख रुपए हो गया, जिसमें से परिवार पहले ही 20 से 25 हजार रुपए जमा करा चुका है। आर्थिक तंगी के कारण वे शेष राशि का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।

माता रामदेवी और पिता रघुनाथ का आरोप है कि बकाया राशि के कारण अस्पताल प्रबंधन बच्चे का शव नहीं दे रहा है। परिवार ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर शव दिलाने और अंतिम संस्कार कराने में मदद की मांग की है।

फिलहाल इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से भी मामले में कार्रवाई या जांच संबंधी जानकारी का इंतजार है।