आखिर किसके हाथ में जाएगा मीरी-पीरी संस्थान का नियंत्रण?

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मीरी-पीरी चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका खारिज कर शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान का प्रबंधन HSGMC को सौंपने का रास्ता साफ कर दिया है।

आखिर किसके हाथ में जाएगा मीरी-पीरी संस्थान का नियंत्रण?

मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान का प्रबंधन अब HSGMC संभालेगी

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रस्ट की याचिका खारिज की

2022 से चल रहे विवाद में HSGMC को बड़ी कानूनी राहत

कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मीरी-पीरी चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका खारिज करते हुए फैसला Haryana Sikh Gurdwara Management Committee के पक्ष में दिया है।

कुरुक्षेत्र के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर। - Dainik Bhaskar

अदालत के फैसले के बाद अब शाहाबाद जीटी रोड स्थित मेडिकल संस्थान का प्रबंधन HSGMC के हाथों में होगा। सूत्रों के अनुसार कमेटी जल्द ही संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।

फैसले से पहले ही कुरुक्षेत्र स्थित HSGMC मुख्यालय में प्रधान Jagdish Singh Jhinda ने सदस्यों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की थी। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि संस्थान के किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया जाएगा और न ही संस्थान का नाम बदला जाएगा।

उन्होंने कहा कि HSGMC का उद्देश्य केवल संस्थान की सेवाओं को बेहतर बनाना और संगत की भावनाओं के अनुरूप प्रबंधन चलाना है। वहीं HSGMC के पूर्व प्रधान Baljit Singh Daduwal ने फैसले पर सिख संगत का आभार जताया।

HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा।

यह मामला मंगलवार को जस्टिस जगमोहन बंसल की अदालत में सुनवाई के लिए लगा था। इससे पहले 8 मई को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को फैसला आते ही कुरुक्षेत्र और शाहाबाद में संस्थान से जुड़े लोगों के बीच हलचल तेज हो गई।

दरअसल यह विवाद वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने HSGMC को मान्यता दी थी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने चुनाव तक एडहॉक कमेटी का गठन किया था।

बाद में 4 सितंबर 2024 को HSGMC ने मेडिकल सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाया। इसमें ट्रस्ट से जुड़े कुछ सदस्यों को भी शामिल किया गया था। हालांकि ट्रस्ट प्रबंधन ने इसे निजी ट्रस्ट के मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

3 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड के गठन पर स्टे लगा दिया था, जो अब तक जारी था। अब ट्रस्ट की याचिका खारिज होने के बाद HSGMC के लिए संस्थान का प्रबंधन संभालने का रास्ता साफ हो गया है।

हालांकि विवाद अभी पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा। Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee से जुड़े नेताओं ने पहले ही संकेत दिए थे कि अगर फैसला उनके पक्ष में नहीं आया तो वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।

SGPC के पूर्व उपाध्यक्ष Harbhajan Masana ने कहा था कि SGPC हर साल संस्थान पर करोड़ों रुपए खर्च करती है और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी।