क्या साउंड हीलिंग सच में देती है सुकून? प्रेम हॉस्पिटल में मिला जवाब, जानें तनावमुक्‍त रहने का अनूठा तरीका

पानीपत के प्रेम हॉस्पिटल में यास्ता फाउंडेशन ने साउंड हीलिंग सेशन आयोजित किया। डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और जागरूकता पर महत्वपूर्ण संदेश दिए।

क्या साउंड हीलिंग सच में देती है सुकून? प्रेम हॉस्पिटल में मिला जवाब, जानें तनावमुक्‍त रहने का  अनूठा तरीका

प्रेम हॉस्पिटल में यास्ता फाउंडेशन ने 45 मिनट का विशेष साउंड हीलिंग सेशन आयोजित किया

डॉक्टरों, डाइटिशियन और अस्पताल स्टाफ ने लिया हिस्सा, तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति पर हुई चर्चा

विशेषज्ञों ने कहा—मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितनी प्राथमिकता देना जरूरी


पानीपत में बढ़ते तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रेम हॉस्पिटल में यास्ता फाउंडेशन की ओर से एक विशेष साउंड हीलिंग सेशन आयोजित किया गया। करीब 45 मिनट तक चले इस कार्यक्रम में अस्पताल के डॉक्टरों, डाइटिशियन, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को मानसिक शांति, गहरे विश्राम और तनाव प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था। विशेषज्ञों ने इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य को दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए समय-समय पर विशेषज्ञों से परामर्श लेने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

ध्वनि तरंगों के माध्यम से कराया गया विश्राम का अनुभव

कार्यक्रम का संचालन यास्ता फाउंडेशन की संस्थापक, काउंसलर एवं साउंड हीलिंग विशेषज्ञ तेजिंदर कौर ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को विशेष ध्वनि तरंगों के माध्यम से गहरे विश्राम, मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराया। साथ ही बताया कि तनाव प्रबंधन के लिए सकारात्मक जीवनशैली, काउंसलिंग और साउंड हीलिंग जैसी सहायक (Complementary) तकनीकें उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।

डॉ. निर्णय सचदेवा बोले—मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की जरूरत

प्रेम हॉस्पिटल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. निर्णय सचदेवा ने कहा कि आज के समय में मानसिक तनाव केवल मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी, कॉर्पोरेट कर्मचारी, विद्यार्थी और गृहिणियां भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को छिपाने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि दवाइयों और साइकोथेरेपी के साथ यदि मरीज की आवश्यकता के अनुसार रिलैक्सेशन आधारित सहायक तकनीकों का उपयोग किया जाए, तो कई लोगों को मानसिक संतुलन बनाए रखने में अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। उन्होंने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

साउंड हीलिंग बीमारी का इलाज नहीं, मानसिक संतुलन का सहयोगी माध्यम

यास्ता फाउंडेशन की संस्थापक तेजिंदर कौर ने स्पष्ट किया कि साउंड हीलिंग का उद्देश्य किसी बीमारी का प्रत्यक्ष उपचार करना नहीं है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को मानसिक रूप से शांत, भावनात्मक रूप से संतुलित और तनावमुक्त महसूस कराने में सहयोग देना है। उन्होंने कहा कि विशेष ध्वनि कंपन व्यक्ति को गहरे विश्राम की अवस्था तक पहुंचाने में मदद कर सकती हैं, जिससे मन अधिक शांत और सकारात्मक महसूस करता है।

उन्होंने बताया कि यास्ता फाउंडेशन हरियाणा के विभिन्न जिलों में लगातार मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, काउंसलिंग और साउंड हीलिंग सेशन आयोजित कर रहा है, ताकि लोग मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सलाह लें।

डॉ. अभिनव मुटनेजा ने की पहल की सराहना

प्रेम हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. अभिनव मुटनेजा ने कहा कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार दबाव और जिम्मेदारियों के बीच काम करते हैं। ऐसे में इस तरह के वेलनेस सेशन उन्हें मानसिक रूप से तरोताजा महसूस कराने और कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने के पक्ष में है, ताकि कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा जा सके।

डाइटिशियन ने साझा किया अनुभव

अस्पताल की डाइटिशियन ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि साउंड हीलिंग सेशन के दौरान उन्हें मानसिक शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि व्यस्त दिनचर्या के बीच इस तरह के सत्र व्यक्ति को स्वयं के लिए समय निकालने और मानसिक रूप से रीचार्ज होने का अवसर देते हैं।

विशेषज्ञों ने दिया जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञों ने कहा कि जिस प्रकार लोग नियमित रूप से शारीरिक स्वास्थ्य की जांच कराते हैं, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीरता से लेना चाहिए। यदि तनाव, चिंता या अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना संकोच विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि स्वस्थ मन ही स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है।