लिखित आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा 27 दिन का अनशन

सोनम वांगचुक ने 27 दिन बाद लिखित आश्वासन मिलने पर अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। सरकार ने शिक्षा सुधार, पेपर लीक और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने पर सकारात्मक रुख जताया।

लिखित आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा 27 दिन का अनशन
  • 27 दिन बाद सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन समाप्त किया, लिखित आश्वासन मिलने के बाद लिया फैसला
  • सरकार ने तीन प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया, संसद में शिक्षा सुधार और पेपर लीक पर चर्चा का भरोसा
  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर वांगचुक और CJP का रुख अलग-अलग नजर आया

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 27 दिन बाद अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। वांगचुक ने इसके बाद एक वीडियो जारी कर बताया कि उन्होंने केवल लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के ठीक बाद यह वीडियो जारी किया।

वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने साफ कर दिया था कि केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार की ओर से लिखित पत्र मिलने के बाद ही उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।

वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने भी उनसे मुलाकात कर हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपा। सांसदों ने भरोसा दिलाया कि NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शिक्षा सुधारों के मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।

सरकार की ओर से जारी लिखित आश्वासन में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया गया। इसमें 20 जुलाई के संसद मार्च और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक पर संसद में विस्तार से चर्चा कराने तथा NEET पेपर लीक से जुड़े आत्महत्या पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने पर सकारात्मक विचार करने की बात कही गई।

सोनम वांगचुक को सरकार की ओर से जारी लिखित आश्वासन पढ़कर सुनाते केंद्रीय मंत्री जेपी नड्‌डा।

अनशन समाप्त करवाने के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने वांगचुक को सरकार का पत्र पढ़कर सुनाया। इसके बाद उन्हें शॉल ओढ़ाकर जूस पिलाया गया। जूस पीने के बाद वांगचुक ने मुस्कुराते हुए कहा कि "26 दिनों बाद इसका स्वाद बहुत अच्छा लग रहा है, लेकिन भूख का स्वाद भी बुरा नहीं होता।"

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर अलग तस्वीर सामने आई है। वीडियो संदेश और पत्र में सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई उल्लेख नहीं किया। वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है। राजनीतिक जानकार इसे आंदोलन के भीतर दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख के रूप में देख रहे हैं।

वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना है। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है, इसलिए उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

फिलहाल मेदांता अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम उनकी निगरानी कर रही है। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार सोनम वांगचुक की हालत स्थिर है। वह पूरी तरह होश में हैं और उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य सीमा के भीतर हैं।