6 मरीजों को नया जीवन दे गए सेना के नायब सूबेदार: पत्नी के अंगदान के फैसले ने लिखी मानवता की मिसाल
लद्दाख में ब्रेन स्ट्रोक के बाद ब्रेन डेड घोषित भारतीय सेना के नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह के अंगदान से छह मरीजों को नया जीवन मिला। पत्नी कुसुम के फैसले ने मानवता की मिसाल पेश की।
➤ लद्दाख में ब्रेन स्ट्रोक के बाद नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह को किया गया ब्रेन डेड घोषित
➤ पत्नी कुसुम ने अंगदान का फैसला लेकर 6 मरीजों को नई जिंदगी दी
➤ कमांड अस्पताल चंडीमंदिर में पहली बार सफलतापूर्वक फेफड़ों का निष्कर्षण किया गया
भारतीय सेना के नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह ने अपने निधन के बाद भी मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जो लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी। लद्दाख के 16 हजार फीट ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एयर एम्बुलेंस से कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान), चंडीमंदिर लाया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। 21 जुलाई को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
इस कठिन घड़ी में उनकी पत्नी कुसुम ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अंगदान का निर्णय लिया। उनके इस फैसले से छह गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। सेना और चिकित्सा जगत ने इस निर्णय को मानवता और सेवा-भाव का अद्भुत उदाहरण बताया है।
हरियाणा के महेंद्रगढ़ के रहने वाले थे वीरेंद्र सिंह
नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के कनीना क्षेत्र के निवासी थे। वह भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लद्दाख में तैनाती के दौरान अचानक ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद उन्हें तत्काल एयरलिफ्ट कर चंडीमंदिर लाया गया, जहां लगातार इलाज चलता रहा। हालांकि उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
अंगदान से छह लोगों को मिला जीवन
वीरेंद्र सिंह की दोनों किडनी, एक लिवर, दोनों फेफड़े, दोनों कॉर्निया तथा अन्य ऊतकों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। इससे विभिन्न अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को नया जीवन मिला।
कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान) के इतिहास में यह पहला अवसर रहा जब फेफड़ों का सफल निष्कर्षण किया गया। इसे सेना के चिकित्सा इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
अलग-अलग राज्यों में भेजे गए अंग
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण नेटवर्क (NOTTO) के माध्यम से अंगों का आवंटन किया गया।
- एक किडनी और दोनों कॉर्निया का प्रत्यारोपण कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर में किया गया।
- दूसरी किडनी हरियाणा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन को भेजी गई।
- लिवर को आर्मी अस्पताल (आर एंड आर), नई दिल्ली भेजा गया।
- दोनों फेफड़े हैदराबाद के केआईएमएस अस्पताल भेजे गए।
अंगों को समय पर सुरक्षित पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिसमें सैन्य पुलिस, नागरिक प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने समन्वय किया।
सेना ने दी श्रद्धांजलि
सेना के प्रवक्ता ने कहा कि नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह का सर्वोच्च बलिदान और उनकी पत्नी कुसुम का निस्वार्थ निर्णय पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनका यह कदम लोगों को अधिक से अधिक अंगदान के लिए प्रेरित करेगा और कई जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद जगाएगा।
Akhil Mahajan