अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए दी 30 दिन की छूट: ट्रंप प्रशासन का फैसला, भारत में विपक्ष ने उठाए सवाल

अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के बाद भारत में विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा है।

अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए दी 30 दिन की छूट: ट्रंप प्रशासन का फैसला, भारत में विपक्ष ने उठाए सवाल

■ अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी
■ पहले रूस से तेल खरीद पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था
■ विपक्ष ने फैसले पर सरकार से जवाब मांगते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी


नई दिल्ली। रूस से तेल खरीद को लेकर चल रही वैश्विक राजनीति के बीच अमेरिका ने भारत को सीमित राहत देते हुए 30 दिनों की विशेष छूट देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दी है। इस फैसले के बाद भारत की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

दरअसल, अमेरिका ने पहले रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस फैसले का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था, क्योंकि रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में शामिल है।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने फरवरी 2026 में कहा था कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करने का भरोसा दिया है, इसलिए दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाया जा रहा है। उसी समय अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी।

हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि भारत रूस से तेल आयात में कमी नहीं करता है तो टैरिफ को दोबारा बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक किया जा सकता है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसे यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर अलग-थलग करना है।

भारत का रुख: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि

भारत सरकार की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और 1.4 अरब लोगों की जरूरतें सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। भारत की कई बड़ी तेल रिफाइनरी कंपनियां रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन करने के बाद अन्य देशों को भी निर्यात करती रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए अमेरिका का यह 30 दिन का फैसला एक अस्थायी रणनीति हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अचानक पैदा होने वाले दबाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

अमेरिका की ओर से दी गई इस 30 दिन की छूट को लेकर भारत में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत की दीर्घकालिक नीति क्या है और अमेरिका के दबाव का भारत पर कितना असर पड़ रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में यह मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों, वैश्विक ऊर्जा राजनीति और रूस-यूक्रेन युद्ध की रणनीति पर भी असर डाल सकता है।