त्‍वरित टिप्‍पणी: खट्टर की 'गुड बुक' में होने का संजय भाटिया को मिला बड़ा इनाम!

हरियाणा राज्यसभा चुनाव के लिए संजय भाटिया को भाजपा उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी होने और संगठन में लंबी सेवा का उन्हें इनाम मिला है। जानें पूरी सियासी कहानी।

त्‍वरित टिप्‍पणी: खट्टर की 'गुड बुक' में होने का संजय भाटिया को मिला बड़ा इनाम!


■ टिकट कटने के बाद भी संगठन में सक्रियता ने संवारा राज्यसभा का रास्ता
■ वफादारी और धैर्य की मिसाल, विरोध के बावजूद मनोहर लाल का साथ नहीं छोड़ा


हरियाणा की राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की पसंद दिल्ली दरबार में काफी मायने रखती है और संजय भाटिया का राज्यसभा उम्मीदवार बनना इसी बात की तस्दीक करता है। पानीपत के रहने वाले भाटिया को खट्टर का सबसे भरोसेमंद सिपाही माना जाता है, और यही वजह है कि जब पार्टी ने उनके राजनीतिक भविष्य पर फैसला लिया, तो उनकी वफादारी को सबसे ऊपर रखा गया।

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में संजय भाटिया का करनाल से टिकट काटकर खुद मनोहर लाल खट्टर चुनाव लड़े थे। उस समय राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि भाटिया शायद नाराज हो सकते हैं या उन्हें विधानसभा लड़ाया जाएगा, लेकिन पार्टी ने उन्हें विधानसभा का टिकट भी नहीं दिया। इसके बावजूद भाटिया ने बिना किसी सार्वजनिक शिकायत के संगठनात्मक गतिविधियों और खट्टर के चुनाव प्रचार में खुद को झोंक दिया, जिसका फल अब उन्हें उच्च सदन की सदस्यता के रूप में मिलने जा रहा है।

संजय भाटिया और मनोहर लाल के बीच का यह तालमेल आज का नहीं, बल्कि दशकों पुराना है। जब खट्टर संगठन में थे, तब से भाटिया उनके पदचिह्नों पर चलते रहे हैं। 2019 के चुनाव में जब भाटिया ने 6.56 लाख वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, तब इसे खट्टर की रणनीति की जीत बताया गया था। अब जबकि हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 31-31 वोटों का गणित बैठ रहा है, भाजपा ने एक सुरक्षित सीट पर अपने सबसे भरोसेमंद चेहरे को उतारकर यह संदेश दिया है कि पार्टी में धैर्य और अनुशासन का इनाम जरूर मिलता है। कांग्रेस जहां अभी अपने पत्ते नहीं खोल पा रही है, वहीं भाजपा ने भाटिया के नाम के जरिए राज्य के पंजाबी समुदाय और अपने कोर वोट बैंक को भी साधने की कोशिश की है। राज्यसभा के जरिए भाटिया की संसद में वापसी न केवल उनके व्यक्तिगत कद को बढ़ाएगी, बल्कि प्रदेश की भावी राजनीति में खट्टर गुट की पकड़ को भी और मजबूत करेगी।

हरियाणा राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने संजय भाटिया पर खेला दांव, दूसरी सीट के लिए सियासी गणित पेचीदा


भाजपा ने राज्यसभा के लिए संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया
16 मार्च को मतदान, 5 मार्च नामांकन की आखिरी तारीख
दूसरी सीट के लिए भाजपा को 9 क्रॉस वोट की जरूरत


हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मुकाबले का संकेत दे दिया है। मंगलवार दोपहर पार्टी ने अलग-अलग राज्यों के उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें हरियाणा से भाटिया का नाम शामिल है। मौजूदा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है और फिलहाल दोनों सीटें भाजपा के पास हैं। इन सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है, जबकि 5 मार्च नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तय की गई है। कांग्रेस ने अभी अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही है।

संगठन से संसद तक का सफर

पानीपत के मॉडल टाउन निवासी संजय भाटिया का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। उन्होंने आईबी कॉलेज पानीपत से बीकॉम की पढ़ाई की और कॉलेज समय से ही भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे। 1987 में मंडल सचिव और 1989 में जिला महासचिव बने। 1998 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का राज्य महासचिव बनाया गया। संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद वह हरियाणा खादी और ग्राम उद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे।

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें करनाल से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने 9 लाख 11 हजार 594 वोट हासिल कर कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 6 लाख 56 हजार 142 वोटों के भारी अंतर से हराया। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काटकर करनाल से मनोहर लाल खट्टर को उम्मीदवार बनाया गया। इसके बाद उन्हें विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़वाया गया, लेकिन वह लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के जरिए फिर से संसद भेजने की तैयारी कर ली है।

31 वोट का कोटा तय करेगा जीत-हार

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 वैध मत हैं। इनमें भाजपा के 48, कांग्रेस के 37, निर्दलीय 3 और इनेलो के 2 विधायक शामिल हैं। राज्यसभा की 2 सीटों के लिए जीत का कोटा निकालने का फार्मूला है – कुल वैध मत ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1। यानी 90 ÷ 3 + 1 = 31। इसका मतलब है कि किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 31 वोट चाहिए।

एक-एक सीट पर लगभग सहमति

पहले राउंड में भाजपा अपने एक उम्मीदवार को 31 वोट देकर आसानी से जिता सकती है, जिससे उसके पास 17 वोट बचेंगे। कांग्रेस भी अपने उम्मीदवार को 31 वोट देकर जीत सुनिश्चित कर सकती है और उसके पास 6 वोट शेष रहेंगे। इस गणित के अनुसार पहली सीट भाजपा और दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है।

दूसरी सीट पर असली चुनौती

पहले चरण के बाद भाजपा के पास 17, कांग्रेस के 6, निर्दलीय 3 और इनेलो के 2 वोट बचते हैं। कुल मिलाकर 28 वोट बनते हैं, जो जीत के लिए जरूरी 31 से कम हैं। यदि निर्दलीय और इनेलो भाजपा का समर्थन भी कर दें तो संख्या 22 तक पहुंचेगी। ऐसे में भाजपा को दूसरी सीट जीतने के लिए कम से कम 9 क्रॉस वोट की जरूरत होगी। यानी 17 + 3 + 2 + 9 = 31। यही वह सियासी समीकरण है जो आने वाले दिनों में दलों की रणनीति तय करेगा।

राज्यसभा चुनाव में अक्सर क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक मतदान परिणामों को चौंकाने वाला बना देते हैं। ऐसे में सबकी नजर अब कांग्रेस के उम्मीदवार और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिकी है।