अमित शाह का रास्ता रोकने के मामले में नवीन जयहिंद बरी: आठ साल पुराने केस में कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
रोहतक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का रास्ता रोकने के मामले में समाजसेवी नवीन जयहिंद को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। आठ साल पुराने केस में बड़ा फैसला।
- अमित शाह का रास्ता रोकने के मामले में नवीन जयहिंद बरी
- आठ साल बाद सबूतों के अभाव में कोर्ट का बड़ा फैसला
- रोहतक सीजीएम कोर्ट ने सभी आरोपों से मुक्त किया
रोहतक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का रास्ता रोकने और काफिले के मार्ग में सांड डालने के चर्चित मामले में समाजसेवी नवीन जयहिंद को बड़ी राहत मिली है। करीब आठ साल तक चले इस मामले में अदालत ने सबूतों के अभाव में नवीन जयहिंद को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला रोहतक की सीजीएम लवलीन कौर की अदालत ने सुनाया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रोहतक दौरे पर आए थे। उस दौरान पुलिस ने नवीन जयहिंद पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अमित शाह का रास्ता रोका और उनके काफिले के रास्ते में सांड डालकर अवरोध उत्पन्न किया। पुलिस ने इस संबंध में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
मामला लंबे समय तक अदालत में विचाराधीन रहा। करीब आठ वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। अदालत में पेश गवाहों के बयान और सबूतों में विरोधाभास सामने आया, जबकि कई अहम तथ्यों की पुष्टि नहीं हो सकी।
अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोप ठोस सबूतों के आधार पर सिद्ध नहीं हो पाए हैं। इसी आधार पर समाजसेवी नवीन जयहिंद को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
फैसले के बाद नवीन जयहिंद ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में राजनीतिक कारणों से उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिससे उन्हें लंबे समय तक मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताया और कहा कि इस फैसले से उनकी साख बहाल हुई है।
फैसले के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया और मिठाइयां बांटी गईं। वहीं कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि बिना ठोस सबूत किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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