जीवन कुंडू हत्याकांड: सरकार ने सारी मांगें मानी, 10 किसानों की जमानत मंजूर

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में हरियाणा से जुड़े चार नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिली है। संजय भाटिया और सतीश पूनिया राष्ट्रीय महामंत्री बने, जबकि सिद्धार्थ यादव और अरुण यादव को भी संगठन में नई जिम्मेदारी मिली। ओपी धनखड़ को नई टीम में जगह नहीं मिली।

जीवन कुंडू हत्याकांड: सरकार ने सारी मांगें मानी, 10 किसानों की जमानत मंजूर

सरकार ने न्याय संघर्ष समिति की मांगों पर जताई सहमति, मुख्य आरोपी रमेश अत्री की गिरफ्तारी का आश्वासन
हांसी कोर्ट से सुरेश कोथ समेत 10 किसानों को जमानत, रिहाई के बाद अंतिम संस्कार
हांसी टकराव पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल, AK-47 और पथराव के आरोपों ने बढ़ाई सियासी गर्मी


हिसार। बहुचर्चित जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हिसार में महापंचायत और लगातार बढ़ते दबाव के बीच न्याय संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हुई वार्ता में आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की बात सामने आई है। समिति के अनुसार, सरकार ने मुख्य आरोपी रमेश अत्री की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही 15 अगस्त को हांसी में दर्ज मुकदमे रद्द करने, पकड़े गए वाहनों को वापस लौटाने और पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करने पर भी सहमति बनी है।

प्रदर्शनकारियों को आगे से बढ़ने से रोकती हांसी पुलिस।

वार्ता के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने जीवन कुंडू के अंतिम संस्कार के लिए सहमति जताई है। परिवार की ओर से अब हत्या के 14 दिन बाद किनाला में अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले न्याय की मांग को लेकर परिवार और ग्रामीणों की ओर से अंतिम संस्कार रोककर आंदोलन किया जा रहा था।

समिति सदस्य और पूर्व सरपंच रवि कुंडू ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में मांगों को लेकर सकारात्मक सहमति बनी। बैठक में भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुरेन्द्र पूनिया ने मध्यस्थता की। समिति के सदस्य भी उनके साथ चंडीगढ़ पहुंचे थे। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिए जाने की बात कही गई है।

हांसी एसपी खुद लोगों पर पत्थर फेंकते दिखे थे।

18 अगस्त से हाईवे बंद करने की थी चेतावनी

सरकार के साथ बातचीत से पहले आंदोलनकारी पंचायत ने अपना रुख साफ कर दिया था। पंचायत की ओर से कहा गया था कि यदि चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक बेनतीजा रहती है, तो 18 अगस्त से हिसार-दिल्ली, हिसार-सिरसा और हिसार-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

ऐसे में सरकार और न्याय संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता को आंदोलन को आगे बढ़ने से रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब समिति की ओर से सरकार के साथ बनी सहमति और उस पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

सीआइए इंचार्ज कप्तान सिंह AK 47 पकड़ता हुआ। अपनी बात रखते सांसद दीपेंद्र हुड्‌डा और इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला।

हांसी कोर्ट से 10 किसानों को जमानत

इसी बीच 15 अगस्त को हुए हांसी टकराव के मामले में भी आंदोलनकारियों को बड़ी राहत मिली है। हांसी कोर्ट ने सुरेश कोथ सहित 10 किसानों की जमानत मंजूर कर ली है। इन सभी किसानों को भोंडसी जेल से रिहा किया जाएगा।

आंदोलन से जुड़े लोगों के मुताबिक किसानों की रिहाई के बाद ही जीवन कुंडू का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस तरह एक तरफ सरकार के साथ मांगों पर सहमति बनी है, वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तार किसानों को न्यायिक राहत मिलने से आंदोलनकारियों के बीच भी माहौल बदलता दिखाई दे रहा है।

15 अगस्त को हांसी में कैसे बिगड़े थे हालात?

जीवन कुंडू मामले से जुड़े आंदोलन के दौरान 15 अगस्त को हांसी के नेहरू कॉलेज में मुख्यमंत्री के जिला स्तरीय ध्वजारोहण कार्यक्रम से पहले तनाव की स्थिति पैदा हुई थी। जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 6:40 बजे सिसाये पुल नाके पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और वाहनों के साथ करीब 150 से 200 लोग जमा हुए थे।

प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया। लेकिन पुलिस के अनुसार स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती चली गई। पुलिस का आरोप है कि भीड़ की ओर से बैरिकेड्स तोड़ने और पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की गई तथा पथराव किया गया।

इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस झड़प में हांसी SP विनोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए गए।

मजिस्ट्रेट के आदेश पर हुआ लाठीचार्ज

पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के लगातार उग्र होने और बैरिकेड्स तोड़कर पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 16 व 17 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लाठीचार्ज की अनुमति दी।

पुलिस बल ने हल्का बल प्रयोग करते हुए भीड़ को डेटा रोड कैंची तक खदेड़ा। पुलिस का कहना है कि इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता थी।

हालांकि, आंदोलनकारियों और विपक्षी नेताओं की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग सवाल उठाए गए हैं। यही वजह है कि हांसी की घटना अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है, बल्कि राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन चुकी है।

हांसी SP और पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

घटना के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो को लेकर भी विवाद बढ़ा। आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए। वहीं पुलिस के आधिकारिक घटनाक्रम में कहा गया कि पथराव के बीच SP विनोद कुमार मौके पर पहुंचे और जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए भीड़ को तितर-बितर कराया।

यहीं से घटनाक्रम को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। पुलिस की ओर से जहां प्रदर्शनकारियों पर पथराव और हिंसक व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं, वहीं विपक्ष और किसान संगठनों की ओर से पुलिस अधिकारियों के आचरण और कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दीपेंद्र हुड्डा ने उठाए पुलिस की भूमिका पर सवाल

मामले में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने हांसी की घटना को लेकर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हांसी में CIA इंचार्ज कप्तान सिंह द्वारा AK-47 जैसे हथियार को लहराना, आपस में छीना-झपटी और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पथराव के दृश्य कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

हुड्डा ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिस तरह हांसी में स्थिति बनी और पुलिस अधिकारियों की भूमिका सामने आई, उसकी जांच जरूरी है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस की ओर से घटनाक्रम का अपना पक्ष रखा गया है, जबकि विपक्ष और किसान संगठनों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र जांच ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट कर सकती है।

दिग्विजय चौटाला ने CIA इंचार्ज पर साधा निशाना

INLD से जुड़े दिग्विजय चौटाला ने भी हांसी की घटना को लेकर सरकार और पुलिस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में पुलिस का रूप बदलकर बेवर्दी गुंडों जैसा हो गया है।

दिग्विजय चौटाला ने सवाल उठाया कि बिना वर्दी के AK-47 लेकर पुलिसकर्मी का मौके पर आना किस कानून के तहत है। उन्होंने कहा कि असॉल्ट राइफल देश की सीमा की सुरक्षा के लिए दी जाती है और उसके इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उनके बयान के बाद मामला और अधिक राजनीतिक हो गया है। अब विपक्षी दल हांसी की घटना को लेकर सरकार को घेर रहे हैं और पुलिस की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं।

SKM ने लगाए गोली चलाने के प्रयास के आरोप

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी हांसी की घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मोर्चे का कहना है कि पुलिस ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के उन आदेशों की अनदेखी की, जिनमें प्रदर्शनों के दौरान अधिकारियों के वर्दी में रहने को लेकर निर्देश होने की बात कही गई है।

SKM ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में आए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने AK-47 से गोली चलाने का प्रयास किया। हालांकि, यह संगठन का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि या जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

अब सबसे बड़ा सवाल आंदोलन के अगले कदम पर

जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा आंदोलन अब सरकार के साथ बनी सहमति के बाद नए चरण में पहुंच गया है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी, मुकदमों की वापसी, वाहनों की रिहाई और पीड़ित परिवार की मदद जैसे मुद्दों पर सरकार की ओर से सहमति की बात सामने आई है।

दूसरी ओर, हांसी में गिरफ्तार किसानों को जमानत मिल चुकी है। ऐसे में आंदोलनकारियों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि सरकार की ओर से बैठक में किए गए आश्वासनों को जमीन पर कितनी जल्दी लागू किया जाता है।

जीवन कुंडू की हत्या के 14 दिन बाद अंतिम संस्कार की सहमति बनना इस पूरे घटनाक्रम का फिलहाल सबसे बड़ा घटनाक्रम है। लेकिन हांसी में 15 अगस्त को हुए टकराव, पुलिस कार्रवाई, AK-47 के इस्तेमाल और पथराव से जुड़े आरोपों की जांच को लेकर विवाद अभी खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा।

अब निगाहें मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और सरकार की ओर से मानी गई मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि हांसी टकराव को लेकर पुलिस और आंदोलनकारियों के अलग-अलग दावों की निष्पक्ष जांच कब और किस स्तर पर होती है।