‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ से ‘बंटवारा 1947’ तक,जब फिल्मों में उतरा 1947 के विभाजन का दर्द

आजादी और विभाजन की त्रासदी पर बनी फिल्मों में बंटवारा 1947, ट्रेन टू पाकिस्तान, पिंजर, गदर और भाग मिल्खा भाग जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।

‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ से ‘बंटवारा 1947’ तक,जब फिल्मों में उतरा 1947 के विभाजन का दर्द

विभाजन के दर्द पर बनी फिल्मों में ‘बंटवारा 1947’ भी शामिल

‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ से ‘गदर’ तक फिल्मों ने दिखाया बंटवारे का दर्द

हिंसा, विस्थापन और अधूरी मोहब्बत की कहानियां आज भी करती हैं भावुक

नई दिल्ली। 15 अगस्त को देश आजादी का पर्व मना रहा है। वर्ष 1947 में अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली, लेकिन इसी के साथ भारत के विभाजन का गहरा दर्द भी देश ने झेला। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद करोड़ों लोग विस्थापित हुए और कई परिवार हिंसा के कारण बिछड़ गए।

विभाजन की इसी त्रासदी को बॉलीवुड और हिंदी सिनेमा ने अलग-अलग कहानियों के जरिए पर्दे पर उतारा है। इन फिल्मों में कहीं विस्थापन का दर्द दिखाई दिया तो कहीं हिंसा के बीच रिश्तों और मोहब्बत की कहानी सामने आई।

14 अगस्त को रिलीज हुई ‘बंटवारा 1947’ भी विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों की इस कड़ी में शामिल है। स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले सिनेमाघरों में पहुंची इस फिल्म ने एक बार फिर 1947 के उस दौर को चर्चा में ला दिया है।

‘ट्रेन टू पाकिस्तान’

साल 1998 में रिलीज हुई ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ खुशवंत सिंह के चर्चित उपन्यास पर आधारित फिल्म है। कहानी भारत-पाकिस्तान सीमा के पास बसे एक काल्पनिक गांव के इर्द-गिर्द घूमती है।

फिल्म में विभाजन के दौरान बदलते सामाजिक माहौल और लोगों के बीच पैदा हुए डर को दिखाया गया है। फिल्म में निर्मल पांडे, रजित कपूर, मोहन अगाशे और स्मृति मिश्रा अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।

‘पिंजर’ में महिलाओं का संघर्ष

साल 2003 में आई ‘पिंजर’ भी विभाजन की त्रासदी पर केंद्रित चर्चित फिल्मों में शामिल है। फिल्म में उर्मिला मातोंडकर, मनोज बाजपेयी और संजय सूरी प्रमुख भूमिकाओं में थे।

कहानी के जरिए विभाजन के दौरान महिलाओं पर हुई हिंसा, उनके संघर्ष और उस दौर में उनसे छीने गए अधिकारों को सामने लाया गया। फिल्म ने विभाजन की त्रासदी को एक महिला के नजरिए से दिखाने की कोशिश की।

‘पार्टीशन’ में मोहब्बत और बंटवारे का दर्द

साल 2007 में आई ‘पार्टीशन’ में बंटवारे के बाद पैदा हुए तनाव और दहशत को एक प्रेम कहानी के जरिए दिखाया गया। कहानी एक पूर्व सिख सैनिक और नसीम नाम की मुस्लिम युवती के रिश्ते के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।

दोनों की मोहब्बत के बीच बंटवारे की परिस्थितियां किस तरह दीवार बनती हैं, फिल्म इसी भावनात्मक संघर्ष को सामने रखती है।

‘गदर’ में दिखी तारा सिंह की कहानी

‘गदर : एक प्रेम कथा’ साल 2001 में रिलीज हुई थी। सनी देओल और अमीषा पटेल अभिनीत इस फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित थी।

सनी देओल ने सिख ट्रक ड्राइवर तारा सिंह का किरदार निभाया था, जबकि अमीषा पटेल सकीना की भूमिका में नजर आई थीं। फिल्म ने विभाजन के बीच एक प्रेम कहानी और परिवार को साथ लाने की कोशिश को बड़े स्तर पर पेश किया।

फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसका दूसरा भाग ‘गदर 2’ वर्ष 2023 में रिलीज हुआ और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की।

‘भाग मिल्खा भाग’ में बचपन का दर्द

फरहान अख्तर अभिनीत ‘भाग मिल्खा भाग’ वर्ष 2013 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म महान भारतीय एथलीट मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित थी।

फिल्म में मिल्खा सिंह के बचपन और विभाजन के दौरान देखी गई हिंसा को भी दिखाया गया। उस दौर की त्रासदी के कारण उन्हें अपने परिवार से बिछड़ना पड़ा और भारत की ओर पलायन करना पड़ा।

इस तरह फिल्म ने एक खिलाड़ी के संघर्ष के साथ-साथ उसके जीवन में विभाजन की छोड़ी हुई गहरी छाप को भी दर्शाया।

‘टोबा टेक सिंह’ में मंटो की कहानी

साल 2018 में आई हिंदी शॉर्ट फिल्म ‘टोबा टेक सिंह’ मशहूर उर्दू लेखक सआदत हसन मंटो की इसी नाम की कहानी पर आधारित थी। फिल्म का निर्देशन केतन मेहता ने किया और पंकज कपूर ने बिशन सिंह की भूमिका निभाई।

कहानी विभाजन के बाद पैदा हुई उस मानसिक और मानवीय त्रासदी को सामने रखती है, जिसमें इंसानों के बीच खींची गई सीमा उनके अस्तित्व और पहचान पर सवाल खड़े कर देती है। फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर उपलब्ध रही है।

‘मैं वापस आऊंगा’ में विभाजन के बाद की मोहब्बत

इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी ‘मैं वापस आऊंगा’ भी विभाजन की पृष्ठभूमि से जुड़ी प्रेम कहानी पेश करती है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शरवरी, नसीरुद्दीन शाह और वेदांग रैना अहम भूमिकाओं में हैं।

कहानी सिख परिवार से ताल्लुक रखने वाले कीनू और मुस्लिम लड़की जिया के रिश्ते पर केंद्रित है। विभाजन के बाद उनकी प्रेम कहानी दर्दनाक मोड़ लेती है।

फिल्मों में जिंदा है 1947 की याद

भारत-पाकिस्तान विभाजन को करीब आठ दशक बीत चुके हैं, लेकिन उसकी यादें आज भी साहित्य, सिनेमा और परिवारों की कहानियों में मौजूद हैं। इन फिल्मों ने अलग-अलग किरदारों के जरिए उस दौर के विस्थापन, हिंसा, डर, रिश्तों और मानवीय संघर्ष को दिखाया है।

‘बंटवारा 1947’ के सिनेमाघरों में आने के साथ एक बार फिर विभाजन पर बनी इन फिल्मों की चर्चा तेज हो गई है। आजादी के जश्न के साथ 1947 की उस त्रासदी को याद करना भी इतिहास के उस दौर को समझने का एक माध्यम है।