BAMS डॉक्टर ने सर्जन बताकर कर दिया म‍हिला का ऑपरेशन, पेट में छोड़ी पट्टी; अंग खराब, मामला पहुंचा स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के पास

चरखी दादरी के निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मेडिकल लापरवाही के आरोपों पर मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने एसपी को सख्त जांच और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

BAMS डॉक्टर ने सर्जन बताकर कर दिया म‍हिला का ऑपरेशन,  पेट में छोड़ी पट्टी; अंग खराब, मामला पहुंचा स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के पास

सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान पेट में पट्टी छोड़ने का आरोप

मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने एसपी को सख्त जांच के आदेश दिए

बीएएमएस डॉक्टर पर खुद को सर्जन बताकर ऑपरेशन करने का आरोप


चरखी दादरी शहर के एक निजी अस्पताल में महिला मरीज के ऑपरेशन के दौरान कथित मेडिकल लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने शनिवार को आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के समक्ष शिकायत रखकर न्याय की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सिजेरियन डिलीवरी के दौरान महिला डॉक्टर ने मरीज के पेट में पट्टी छोड़ दी, जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और शरीर के अंदरूनी अंग भी प्रभावित हुए।

महिला के जेठ ने समिति के समक्ष बताया कि उसके भाई नरेश ने अपनी पत्नी की डिलीवरी शहर के एक निजी अस्पताल में कराई थी। ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत लगातार खराब रहने लगी। बाद में जब उसका इलाज जोधपुर एम्स में कराया गया तो वहां जांच के दौरान पता चला कि ऑपरेशन के समय पेट में पट्टी छोड़ी गई थी, जिसे मेडिकल लापरवाही माना गया।

परिजनों ने बताया कि इस मामले की शिकायत उन्होंने पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी की थी। शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पताल को सील किया और मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई। हालांकि, उनका आरोप है कि केवल दो दिन बाद ही अस्पताल की सील खोल दी गई तथा पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के साथ मिलीभगत करते हुए चालान तैयार कर अदालत में पेश कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने चरखी दादरी एसपी लोगेश कुमार पी. को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन या डॉक्टरों की लापरवाही सामने आती है तो किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाए। उन्होंने प्रशासन को यह भी निर्देश दिए कि न्यायालय का अंतिम फैसला आने तक इस मामले से जुड़े डॉक्टर किसी अन्य संस्थान में भी चिकित्सा अभ्यास न करें।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जिस महिला चिकित्सक ने ऑपरेशन किया, वह बीएएमएस डिग्रीधारी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उसने स्वयं को सर्जन बताकर ऑपरेशन किया था। डीसी मनदीप कौर ने बैठक में बताया कि संबंधित महिला चिकित्सक ने अपने बयान में भी इस तथ्य को स्वीकार किया है।

इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले की तीन बार जांच करा चुका है तथा एक जांच पीजीआई मेडिकल टीम से भी कराई गई है। इस पर मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जांच कितनी भी बार हो, लेकिन यदि परिणाम सामने नहीं आते तो उसका कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।