सरकार-CJP वार्ता में नरमी के संकेत, दो मांगों पर बनी सहमति; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कल दोपहर तक मांगा समय
सरकार और CJP के बीच 50 मिनट की बैठक में दो मांगों पर सकारात्मक संकेत मिले। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने कल दोपहर तक का समय मांगा।
➤ CJP का दावा- सरकार तीन में से दो मांगों पर सकारात्मक, प्रधान के इस्तीफे पर मांगा समय
➤ करीब 50 मिनट चली सरकार और CJP प्रतिनिधिमंडल की बैठक, बातचीत जारी रखने पर सहमति
➤ पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारी, कैबिनेट में नए बिल के मसौदे पर हुई चर्चा
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के देशव्यापी आंदोलन के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में अहम बैठक हुई। करीब 50 मिनट तक चली इस वार्ता के बाद CJP ने दावा किया कि सरकार उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक रुख दिखा रही है। हालांकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने कल दोपहर तक का समय मांगा है। इससे संकेत मिले हैं कि दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी रहेगा।
बैठक के बाद CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने बताया कि सरकार ने पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। इसके अलावा आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मुद्दे पर भी सरकार का रुख सकारात्मक रहा। वहीं शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर चर्चा हुई, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय के लिए सरकार ने कल दोपहर तक का समय मांगा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पेपर लीक से जुड़े नए और सख्त कानून के मसौदे पर चर्चा की गई। सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधित कानून में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किए जाने की चर्चा है।
CJP लंबे समय से NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। संगठन का मुख्य धरना दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हुए थे। वहीं 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई थी।
इस बीच सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने सरकार से सुधार, मुआवजे और संसद में चर्चा का भरोसा मिलने के बाद यह फैसला लिया। दूसरी ओर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई।
उधर, दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 जुलाई के 'संसद चलो मार्च' की NIA जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पूछा कि इसके लिए कानूनी आधार क्या है। अदालत ने कहा कि NIA जांच एजेंसी है, इन्क्वायरी एजेंसी नहीं।
Akhil Mahajan