हरियाणा बजट सत्र से पहले कांग्रेस का बदला तेवर, हंगामे नहीं आंकड़ों से घेरेगी सरकार
हरियाणा बजट सत्र से पहले कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ नई रणनीति बनाई है। हंगामे नहीं, बल्कि आंकड़ों और सरकारी दस्तावेजों के सहारे सरकार को घेरने की तैयारी है।
➤ बजट सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की अहम रणनीतिक बैठक आज
➤ वॉकआउट नहीं, फैक्ट्स और सरकारी रिपोर्ट्स के सहारे सरकार पर हमला
➤ किसान, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और महिला सम्मान राशि मुख्य मुद्दे
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र की तारीख घोषित होते ही कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ सियासी मोर्चा खोल दिया है, लेकिन इस बार अंदाज अलग होगा। हंगामे और वॉकआउट की राजनीति से दूरी बनाते हुए कांग्रेस ने तथ्यों, आंकड़ों और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की रणनीति तैयार की है। इसी कड़ी में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे दिल्ली स्थित कांग्रेस भवन में कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक बुलाई है।
इस बैठक में प्रदेशाध्यक्ष सहित सभी कांग्रेस विधायक शामिल होंगे। बैठक में 20 फरवरी से 27 फरवरी तक चलने वाले बजट सत्र के दौरान अपनाई जाने वाली विस्तृत रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह सत्र कांग्रेस के लिए केवल विरोध नहीं, बल्कि “जिम्मेदार विपक्ष” की छवि गढ़ने का मंच होगा।
नीतिगत विफलताओं पर सीधा वार
कांग्रेस इस बार भावनात्मक आरोपों के बजाय नीतिगत फैसलों और जमीनी हकीकत को सदन में सामने रखेगी। किसानों की आय, बेरोजगारी के वास्तविक आंकड़े, कानून व्यवस्था की स्थिति और सरकारी विभागों में भारी स्टाफ की कमी जैसे मुद्दों पर सरकार से सीधे जवाब मांगे जाएंगे। भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि सरकार की प्री-बजट बैठकों में जनप्रतिनिधियों और आम जनता की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जिसे कांग्रेस सदन में प्रमुखता से उठाएगी।
इसके अलावा यूरिया बैग का वजन घटाने, फसल मुआवजे में देरी, स्कूलों-अस्पतालों और पुलिस विभाग में मैनपावर संकट तथा महिलाओं को 2100 रुपए मासिक सहायता के चुनावी वादे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी है।
क्यों बदली कांग्रेस की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी साल में कांग्रेस सरकार को घेरते हुए यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ विरोध के लिए विरोध नहीं कर रही, बल्कि ठोस तथ्यों के आधार पर जवाबदेही तय करना चाहती है। बजट और विभागीय रिपोर्ट्स के आंकड़ों के सहारे सवाल उठाने से सरकार के लिए विपक्ष को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
ये मुद्दे सदन में उठाएगी कांग्रेस
किसान मुद्दे:
यूरिया बैग का वजन घटाने से बढ़ा आर्थिक बोझ, फसल खराबे के मुआवजे में महीनों की देरी, MSP पर खरीद और भुगतान में अनियमितता, प्री-बजट बैठकों में किसान संगठनों की अनदेखी जैसे सवाल सरकार के सामने रखे जाएंगे।
बेरोजगारी:
स्थायी नौकरियों की कमी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, लंबित परीक्षा परिणाम और कौशल विकास योजनाओं के सीमित असर पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
कानून व्यवस्था:
अपराध के बढ़ते मामले, पुलिस विभाग में स्टाफ की भारी कमी और ग्रामीण-शहरी इलाकों में सुरक्षा को लेकर असंतोष कांग्रेस का बड़ा हथियार रहेगा।
स्कूल–अस्पताल:
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद, अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी को विभागीय आंकड़ों के साथ सदन में उठाया जाएगा।
महिलाओं का मुद्दा:
2100 रुपए मासिक सहायता की घोषणा अब तक लागू न होने, बजट प्रावधान और समय-सीमा पर सरकार की चुप्पी को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरने की तैयारी में है।
Akhil Mahajan