हरियाणा में डिजिटल जनगणना शुरू, अब घर बैठे भर सकेंगे जानकारी
हरियाणा में डिजिटल जनगणना शुरू हो गई है, जिसमें लोग घर बैठे ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। लिव-इन कपल्स को विवाहित माना जाएगा और जियो टैगिंग से हर घर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
■ हरियाणा में डिजिटल जनगणना की शुरुआत
■ घर बैठे ऑनलाइन भर सकेंगे डेटा, 15 दिन पहले मिलेगा मौका
■ लिव-इन रिश्तों को भी माना जाएगा विवाहित
हरियाणा में जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए डिजिटल जनगणना की शुरुआत कर दी गई है। इस नई व्यवस्था का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया। सरकार का दावा है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से जनगणना पहले के मुकाबले अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी होगी, जिससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा।
इस बार जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि गणनाकर्मी मोबाइल ऐप और टैबलेट के जरिए सीधे ऑनलाइन डेटा दर्ज करेंगे। साथ ही पहली बार लोगों को ‘सेल्फ एन्युमरेशन’ यानी खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का विकल्प भी दिया गया है। इसके तहत नागरिक घर-घर सर्वे से 15 दिन पहले पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध होगी और पूरी तरह वैकल्पिक है।
यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन जानकारी नहीं भरता है, तो पारंपरिक तरीके से सरकारी कर्मचारी घर आकर डेटा एकत्र करेंगे। जिन लोगों ने ऑनलाइन जानकारी भर दी है, उनके डेटा का वेरिफिकेशन भी अधिकारी घर जाकर करेंगे, ताकि रिकॉर्ड पूरी तरह सही और प्रमाणित हो सके।
सरकार ने लोगों को सतर्क भी किया है कि जनगणना के दौरान यदि कोई कर्मचारी उनसे उनकी आय, बैंक डिटेल या OTP जैसी निजी जानकारी मांगे, तो उसे साझा न करें। इसी तरह आधार, पैन जैसे दस्तावेज दिखाने का दबाव भी जरूरी नहीं है।
डिजिटल जनगणना में कुछ नई परिभाषाएं भी लागू की गई हैं। जैसे लंबे समय से साथ रह रहे लिव-इन कपल को विवाहित श्रेणी में गिना जाएगा। मोबाइल में FM सुविधा होने पर उसे ‘रेडियो’ माना जाएगा, जबकि मोबाइल पर वीडियो देखना ‘टीवी’ की श्रेणी में नहीं आएगा। इसी तरह ट्रैक्टर को कार/जीप की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा और ई-रिक्शा को अलग वर्ग में रखा जाएगा।
पानी और रसोई से जुड़ी जानकारी में भी बदलाव किया गया है। अगर घर में नल होने के बावजूद लोग बोतल या कैन का पानी इस्तेमाल करते हैं, तो उसे ‘बॉटल्ड वाटर’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। वहीं, घर में अलग से किचन होने पर ही उसे ‘रसोई’ माना जाएगा।
इस बार जनगणना में जियो-टैगिंग के जरिए हर घर को डिजिटल मैप पर ‘डिजी डॉट’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे आपदा प्रबंधन, शहरी योजना, परिसीमन और मतदाता सूची को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में राहत कार्यों की योजना ज्यादा सटीक तरीके से बनाई जा सकेगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी।
जनगणना से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब भी सरकार ने जारी किए हैं। इसमें स्पष्ट किया गया है कि जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है और हर नागरिक का इसमें सहयोग करना जरूरी है। परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, मकान की स्थिति जैसी बुनियादी जानकारी दर्ज की जाएगी। किराएदारों को भी उसी स्थान पर गिना जाएगा, जहां वे रह रहे हैं।
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि जनगणना का डेटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगा तथा इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए किया जाएगा। डिजिटल सिस्टम में ऑफलाइन डेटा सेव करने की सुविधा भी होगी, जिससे नेटवर्क न होने पर भी जानकारी सुरक्षित रहेगी और बाद में अपलोड की जा सकेगी।
स्पष्ट है कि डिजिटल जनगणना हरियाणा में प्रशासनिक सुधार और तकनीकी उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे आने वाले समय में विकास योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
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