सुधीर शर्मा के समर्थन में धर्मशाला में प्रदर्शन,दो FIR की निष्पक्ष जांच की मांग

धर्मशाला में सुधीर शर्मा के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर दो FIR की निष्पक्ष जांच की मांग की। राज्य विधि अधिकारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए।

सुधीर शर्मा के समर्थन में धर्मशाला में प्रदर्शन,दो FIR की निष्पक्ष जांच की मांग

सुधीर शर्मा के समर्थन में धर्मशाला में भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता ने प्रदर्शन किया
■ दो एफआईआर की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग, राजनीतिक प्रतिशोध का लगाया आरोप
■ राज्य के लॉ ऑफिसर्स की राजनीतिक गतिविधियों पर भी राज्यपाल और मुख्य सचिव से हस्तक्षेप की मांग

धर्मशाला, 10 अगस्त। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। भाजपा धर्मशाला मंडल की ओर से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर सुधीर शर्मा से जुड़े दो मामलों में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की गई।

ज्ञापन में FIR No. 05/2026, पुलिस थाना SV&ACB (Vigilance) और FIR No. 141/2026, पुलिस थाना धर्मशाला का उल्लेख करते हुए कहा गया कि पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका की भी जांच होनी चाहिए।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सुधीर शर्मा के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने और सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई लगातार सामने आई है। पार्टी का कहना है कि इस राजनीतिक पृष्ठभूमि को जांच के दौरान नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या जांच एजेंसियों का पक्ष इस सामग्री में सामने नहीं आया है। इसलिए राजनीतिक प्रतिशोध से जुड़े आरोपों को फिलहाल भाजपा की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

भाजपा ने पूछा- क्या सरकार से सवाल करना अपराध है

प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश में सरकार की आलोचना करना अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि किसी निर्वाचित विधायक का सरकार की नीतियों, प्रशासनिक व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

कार्यकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का हवाला देते हुए कानून के समक्ष समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विधिसम्मत प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया।

उनका कहना था कि वे किसी जांच से बचने या किसी पुलिस अथवा जांच एजेंसी की वैधानिक कार्रवाई में हस्तक्षेप की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल यह है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त हो।

दोनों एफआईआर की परिस्थितियों की जांच की मांग

भाजपा ने मांग की कि दोनों एफआईआर में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों का वस्तुनिष्ठ परीक्षण किया जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि एफआईआर दर्ज कराने या जांच को प्रभावित करने में किसी राजनीतिक, प्रशासनिक अथवा बाहरी व्यक्ति का दबाव तो नहीं था।

ज्ञापन में कहा गया कि यदि निष्पक्ष जांच में एफआईआर या उसके आधार पर हुई कार्रवाई राजनीतिक द्वेष, दुर्भावना, दबाव या तथ्यहीन आरोपों पर आधारित पाई जाती है तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने जरूरत पड़ने पर मामले की जांच किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय एजेंसी या अधिकारी से कराने पर विचार करने की मांग भी रखी।

राज्यपाल से रिपोर्ट तलब करने का आग्रह

भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल से दोनों एफआईआर पर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि जांच में राजनीतिक दबाव या कानून के दुरुपयोग के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि सरकार को अपनी कार्रवाई की निष्पक्षता पर भरोसा है तो उसे स्वतंत्र जांच से डरना नहीं चाहिए। उनका तर्क था कि सत्ता में रहने वाली सरकार का काम सवालों का जवाब देना है, न कि सवाल पूछने वालों को मुकदमों में उलझाना।

सुधीर शर्मा ने लॉ ऑफिसर्स की राजनीतिक गतिविधियों पर उठाए सवाल

इसी बीच विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश के कुछ सेवारत राज्य विधि अधिकारियों की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर राज्यपाल को अलग प्रतिवेदन सौंपा है।

प्रतिवेदन में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस लीगल सेल के बैनर तले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे पदाधिकारी ने नेतृत्व किया, जो प्रदेश सरकार में Additional Advocate General का सार्वजनिक पद भी संभाल रहे हैं। इसमें अन्य सेवारत Additional Advocate General और Deputy Advocate General के शामिल होने का भी उल्लेख किया गया है।

सुधीर शर्मा ने इसे राज्य के विधि अधिकारियों की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बताया है। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

नियुक्ति नियमों की जांच की मांग

सुधीर शर्मा ने राज्यपाल से राज्य सरकार से तत्काल रिपोर्ट मांगने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी जांच कराने की मांग की है कि सेवारत Additional Advocate General और Deputy Advocate General की राजनीतिक दल की गतिविधियों में भागीदारी उनकी नियुक्ति की शर्तों और सरकारी नीति के अनुरूप है या नहीं।

उन्होंने राज्य के विधि अधिकारियों के कार्यालय की स्वतंत्रता और तटस्थता बनाए रखने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार को भी प्रतिवेदन दिया है। इसमें समयबद्ध जांच की मांग करते हुए पूछा गया है कि क्या सेवारत विधि अधिकारियों का किसी राजनीतिक दल की आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेना उनकी नियुक्ति की शर्तों या लागू सरकारी नीति का उल्लंघन है।

भाजपा ने कहा- राजनीतिक लड़ाई राजनीतिक मैदान में हो

भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि एक तरफ सरकारी पदों पर नियुक्त विधि अधिकारियों की कथित राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं और दूसरी तरफ विपक्षी विधायक से जुड़े मामलों में एफआईआर और जांच आगे बढ़ रही है। ऐसे में सरकार को दोनों मामलों में पारदर्शिता दिखानी चाहिए।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई राजनीतिक मैदान में लड़ी जानी चाहिए, पुलिस थानों और एफआईआर के माध्यम से नहीं। उन्होंने कहा कि धर्मशाला की जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधि के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।

भाजपा ने दोहराया कि उसका उद्देश्य पुलिस या जांच एजेंसियों की वैधानिक कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कानून का शासन सर्वोपरि रहे और आपराधिक कानून का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए न हो।